राशन के लिए 10 किमी जंगल पार करते हैं ग्रामीणUpdated: Mon, 17 Jul 2017 12:53 AM (IST)

सुविधाओं के अभाव में यहां के ग्रामीणों को राशन के लिए उबड़-खाबड़ मार्ग से 10 किमी सफर करना पड़ता है।

धमतरी। डुबान क्षेत्र के अंतिम छोर में बसे ग्राम सिलतरा विकास की राह तक रहा है। सुविधाओं के अभाव में यहां के ग्रामीणों को राशन के लिए उबड़-खाबड़ मार्ग से 10 किमी सफर करना पड़ता है। सालों से ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर डुबान क्षेत्र के अंतिम ग्राम सिलतरा है। यहां के ग्रामीण स्वंतत्रता के 70 बरस बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। ग्रामीण चंद्रहास सोरी, नकुल सेता, गणेश नेताम, नरेश धु्रव, गोकुल सेवता ने बताया कि गांव पहुंचने के लिए सड़क नहीं बनी है। कच्ची व मिट्टी वाली सड़क पर चलने मजबूर हैं। गांव में राशन दुकान नहीं है।

जंगल के उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत अरौद डुबान के राशन दुकान तक चावल खरीदने जाना पड़ता है। किराना सामग्री लेने दूसरे गांव जाते हैं। बारिश के दिनों में जब सड़क के रपटा में पूरा आ जाता है, तो ग्रामीणों को गंगरेल बांध के लबालब पानी को पार कर नाव से चावल खरीदने जाना पड़ता है। कई बार गांव में राशन दुकान की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक दुकान नहीं खुली है।

बिल पटाने कोई सुविधा नहीं

ग्रामीणों ने आगे बताया कि बिजली बिल पटाने आसपास कोई सुविधा नहीं है। 20 किमी दूर कुकरेल जाना पड़ता है। कुछ ग्रामीण तो 45 किमी दूर धमतरी आते हैं। बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान है। मनमाना बिजली बिल आता है। गांव में सीसी रोड नहीं है।

अधिकांश गलियां मिट्टी व गिट्टी की है। बारिश में कीचड़ हो जाता है, रास्ता चलने लायक नहीं रहता। शासकीय योजनाओं का लाभ पर्याप्त नहीं मिलता। गांव के अधिकांश परिवारों का घर मिट्टी के है, लेकिन गिनती के लोगों को पीएम आवास योजना का लाभ मिला है। पर्याप्त मनरेगा कार्य भी नहीं मिलता।

इस साल सिर्फ दो सप्ताह ही काम मिला है, जिसका भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। गांव के माध्यमिक स्कूल में शिक्षक का अभाव है। यहां सिर्फ एक ही शिक्षक है, जिनके भरोसे माध्यमिक विद्यालय है। सालों से ग्रामीण शिक्षक की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक पदस्थापना नहीं हो पाई है। इससे बच्चों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।

कलेक्टर-एसपी को कभी नहीं देखा

ग्रामीणों का कहना है कि बिहड़ जंगल और उबड़-खाबड़ मार्ग होने के कारण यहां अधिकारी कभी नहीं पहुंचते। हम तो यह भी नहीं जानते की जिले का कलेक्टर व एसपी कौन है। कभी देखे भी नहीं है।

यहां कभी कलेक्टर जैसे जिले के प्रमुख अधिकारी नहीं आए है। ग्रामीण चाहते हैं कि कलेक्टर गांव पहुंचकर गांव के बुनियादी सुविधाओं को दूर करें। गांव में विकास कार्य कराए, इससे गांव के स्तर में सुधार हो।

अटपटी-चटपटी

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