पशु पालना भी अब आसान नहीं, बढ़ गई मुसीबतUpdated: Mon, 09 Oct 2017 01:20 AM (IST)

आवारा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाकर ट्रैफिक व्यवस्था दुरूस्त करने निगम लगातार धरपकड़ अभियान चला रहा है।

धमतरी। आवारा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाकर ट्रैफिक व्यवस्था दुरूस्त करने निगम लगातार धरपकड़ अभियान चला रहा है। जिसके कारण मवेशी मालिक अपने जानवरों को खुला नहीं छोड़ रहे हैं। घर पर ही रखकर चारा खिलाना पड़ रहा है।

जिसकी वजह से कई मवेशी पालकों का खर्चा तीन गुना बढ़ गया है। पहले मवेशी आवारा घूमकर इधर-उधर से भूख मिटा लेते थे। मवेशियों पर बीमारी का खतरा भी मंडराने लगा है क्योंकि उन्हें 24 घंटे चहारदिवारी के बीच रहना पड़ रहा है।

नेशनल हाइवे, शहर के चौक-चौराहों, गलियों और सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की नगर निगम की टीम पिछले कुछ दिनों से धरपकड़ कर रही है। इसके लिए अस्थायी कांजी हाऊस ग्राम अर्जुनी में बनाया गया है। निगम की कड़ी कार्रवाई देखकर पशुपालकों ने अपने मवेशियों को खुले में छोड़ना बंद कर दिया है।

घर में ही बांधकर रख रहे हैं। इससे पशुपालन करने वालों का खर्चा पहले की तुलना में तिगुना हो गया है। शहर के पशुपालक ऋषभ कुमार, मेघराज, कैलाश, नरेन्द्र कुमार, जयलाल ने बताया कि निगम की कार्रवाई की डर से मवेशियों का भूख मिटाने अतिरिक्त चारा खरीदना पड़ रहा है।

पहले 4 गायों के चारा के लिए माह में 2 हजार रुपए खर्च होते था। अब मवेशियों को 24 घंटे घर में रखने से चारा का खर्च 6 हजार से अधिक हो गया है। इसके बावजूद मवेशियों की भूख नहीं मिट पा रही है।

पैराकुट्टी की मांग बढ़ी

आवारा मवेशियों की धरपकड़ कार्रवाई शुरू होने के बाद से पैराकुट्टी, खल्ली, चुनी, चोकर, दाना, घास व्यवसायियों की चांदी हो गई है। व्यवसाय में तेजी आई है। पहले माह में डेढ़ लाख का व्यवसाय होता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से व्यवसाय में 3 से 4 चार गुना बढ़ोत्तरी हुई है।

डिमांड इतनी है कि व्यवसायी पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। पशुपालकों को हर रोज दाना खरीदना पड़ रहा है। क्योंकि मवेशियों को घर में 24 घंटा रखकर उन्हें दाना, पैराकुट्टी समेत अन्य सामग्री खिलानी पड़ रही है।

बीमारी की आशंका से पशुपालक चिंतित

पशुपालकों का कहना है कि 24 घंटे दुधारू गाय व भैंस को घर में बांधकर रखने से दूध की मात्रा कम हो गई है। मवेशी को टहलने के लिए जगह नहीं मिल पाने से एक ही स्थान पर रहने से बीमार होने की आशंका बढ़ गई है। इससे शहर के मवेशी मालिक और डेयरी व्यवसायी परेशान है।

पशुपालकों का कहना है आवारा मवेशियों के खिलाफ निगम की धर पकड़ की कार्रवाई ठीक है, लेकिन मवेशियों के टहलने के लिए कोई निश्चित स्थान तय करना चाहिए। जहां पशुपालक रोज अपने मवेशी को वहां सुबह से शाम तक रखकर टहला सके। वहां चारे की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

409 मवेशी पकड़े गए

20 सितंबर से नगर निगम की कार्रवार्ई शुरू हुई है। 6 अक्टूबर तक 16 दिन में कुल 409 आवारा मवेशियों को निगम टीम ने पकड़कर अस्थाई कांजी हाऊस अर्जुनी पहुंचाया है। इनमें गाय, बछड़ा और सांड शामिल हैं।

अब तक 85 मवेशियों को जुर्माना पटाकर मवेशी मालिक छुड़ाकर ले गए। इससे निगम को 2 लाख 11 हजार 350 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं 31 मवेशियों की नीलामी कर निगम ने बेचा है। इससे निगम को 60 हजार रुपए प्राप्त हुए हैं।

टहला सकते हैं मवेशी

मवेशी मालिक अपने मवेशियों को सड़क व चौक-चौराहों में छोड़ने की बजाए शहर के चारायुक्त स्थल पर मवेशियों को सुरक्षा के बीच टहला सकते हैं। कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। निश्चित समय के बाद मवेशियों को घर पर लाना जरूरी है। डेयरी संचालकों के लिए ग्राम सोरम में गोकुलनगर बनाने कार्य शुरू हो गया है। - अर्चना चौबे, महापौर धमतरी

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