दंतेवाड़ा में नहीं पहुंची मोटरबोट, सरकारी अमला भी डोंगी से हुआ पारUpdated: Fri, 14 Jul 2017 06:23 PM (IST)

मानसून में उफनती इंद्रावती को पार करने शासन की खरीदी गई मोटरबोट अब तक नदी घाट तक नहीं पहुंची है।

दंतेवाड़ा। मानसून में उफनती इंद्रावती को पार करने शासन की खरीदी गई मोटरबोट अब तक नदी घाट तक नहीं पहुंची है। ऐसे में ग्रामीणों के साथ सरकारी अमला भी डोंगी से नदी पार किया। दरअसल श्रम विभाग ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकार की योजना पहुंचाने और श्रमिकों का पंजीयन करने तुमरीगुंडा और चेरपाल में कैंप लगाया। लेकिन गांव नदी पार गांव होने से टीम के सदस्यों को लकड़ी की बनी डोंगी ही सहारा बना।

कैंप में 219 श्रमिकों का पंजीयन कराया गया। ज्ञात हो 36 लाख रुपए खर्च कर खरीदे गए मोटरबोट प्रशिक्षण के अभाव में दंतेवाड़ा और बारसूर नगर निकाय के यार्ड में पड़े हैं। जिन्हें पोंदूम सहित तुमरीगुंडा, पाहुरनार घाट में भिजवाना था।

मानसूनी फुहारों के बीच शुक्रवार को इंद्रावती नदी के बढते जलस्तर को देखते श्रम विभाग के अमले ने ग्राम चेरपाल और तुमरीगुंडा में शिविर लगाने डोंगी से नदी पार किया। बारिश के कारण भीतर के रास्तों में बाइक से जाना संभव नहीं था इसलिए टीम 12 किमी पैदल चली।

ग्राम चेरपाल और तुमरीगुंडा में सुबह पहुंचकर विभाग की विभिन्न् योजनाओं की जानकारी देते चेरपाल में 87 तथा ग्राम पंचायत तुमरीगुंडा में 115 श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया गया। डिप्टी कलेक्टर एवं श्रम अधिकारी मनोज कुमार बंजारे ने बताया श्रम विभाग की अनेक ऐसी योजनाएं हैं जिनका जीवन के हर स्तर पर श्रमिक लाभ उठा सकते हैं।

तुमरीगुंडा और चेरपाल में रजिस्ट्रेशन के साथ बताया गया कि चाहे अपना कार्य शुरू करने औजार की जरूरत हो, या बिटिया के विवाह के लिए आर्थिक राशि की जरूरत। श्रम विभाग की योजनाओं का दायरा बेहद विस्तृत है। विशेष रूप से यह योजनाएं तब अधिक लाभप्रद हो जाती है जब श्रमिक कार्य करते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं जिसकी आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में यदि पहले से श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन हो जाता है तो घटना के तुरंत बाद जरूरी औपचारिकताओं की पूर्ति कर आर्थिक मदद विभाग देता है।

गर्भवती महिलाओं के विशेष सहायता

डिप्टी कलेक्टर बंजारे ने बताया कि गांवों में रजिस्ट्रेशन कैंप लगाने से अच्छा लाभ मिल रहा है। अब हम इन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ दिला सकेंगे। श्रमिक महिला को डिलीवरी के पश्चात विशेष सहायता सन्न्मर्िाण कर्मकार मंडल की ओर से दी जाती है। इस प्रोत्साहन राशि से शिशु के पोषण एवं उसके रखरखाव के लिए होने वाले अन्य खर्चों में काफी मदद मिलती है। मनरेगा में भी गर्भवती माताओं को डिलीवरी के लिए प्रावधान हैं। इस प्रकार इन दोनों योजनाओं को मिला लेने से स्वास्थ्य संबंधी सूचकांक भी बेहतर करने में मदद मिलती है।

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