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महुआ के लिए ग्रामीणों को लाइसेंस, उनकी संस्कृति पर कुठाराघात : देवती कर्माUpdated: Fri, 21 Apr 2017 06:13 PM (IST)

बस्तर की कल्पवृक्ष कही जाने वाली महुआ फूूल को अब ग्रामीण घरों में ज्यादा दिन नहीं रख पाएंगे।

दंतेवाड़ा। बस्तर की कल्पवृक्ष कही जाने वाली महुआ फूूल को अब ग्रामीण घरों में ज्यादा दिन नहीं रख पाएंगे। शासन ने महुआ फूल खरीद-बिक्री के लिए व्यापारियों के साथ ग्रामीणाें को भी लाइसेंस बनाने का आदेश जारी कर दिया है। इसका विरोध करते कांग्रेसी शुक्रवार को राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। जिसमें इसे तुगलकी फरमान बताया है।

साथ ही निवेदन किया है कि महुआ फूल आय के साथ बस्तरिया संस्कृति का अभिन्न् अंग है। इस आदेश को बस्तरियों के पारंपरिक हितों के संरक्षण के लिए वापस लिया जाए।शुक्रवार को विधायक देवती कर्मा के नेतृत्व में कांग्रेसी कलेक्टोरेट पहुंचे और राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। विधायक देवती कर्मा ने कहा कि महुआ फूल बस्तरियों के आय का एक प्रमुख स्रोत हैं। वही देशी तकनीक से निर्मित इसका शराब बस्तरिया संस्कृति का अभिन्न् अंग है। देवी-देवताओं के पूजा-अनुष्ठान से लेकर अन्य धार्मिक, वैवाहिक और सामाजिक कार्याें में महुआ शराब जरूरी होता है।

इनका कहना था कि महुआ के लिए बने नए नियम से आदिवासी संस्कृति पर कुठाराघात हुआ है। महुआ के इस नई नीति से व्यापारी कुछ सीमित लोगों के हाथ में ही केंद्रित हो गया है। जंगलों से महुआ संग्रहण करने वाले ग्रामीणों को नुकसान होना शुरु हो गया है। 40-50 रुपए में बिकने वाला महुआ अब 7-8 रुपए में व्यापारी खरीद रहे हैं।

विधायक ने कहा है कि अंग्रेजी शराब बेचने वाली भाजपा सरकार और प्रशासन अब हमारे संस्कृति के अंग सलफी, लांदा को भी पीने और बेचने पर पाबंदी लगा रहे हैं। यह उचित नहीं है। इसलिए राज्यपाल को पत्र लिखकर आदिवासी संस्कृति को संरक्षण देने राज्य सरकार को उचित दिशा-निर्देश जारी करने अपील की गई है। अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के दौरान विधायक के अलावा कांग्रेस जिलाध्यक्ष विमल सुराना, अवधेश गौतम, छविंद्र कर्मा, वीरेंद्र गुप्ता, रवि कर्मा, विपल्व मलिक सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद थे।

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