बिज्जे ने सगाई तोड़ नक्सली संगठन में थामी थी बंदूकUpdated: Mon, 20 Mar 2017 06:38 PM (IST)

शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच नक्सलियों में से दो का शव परिजन सोमवार को गृहग्राम ले गए।

दंतेवाड़ा। शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच नक्सलियों में से दो का शव परिजन सोमवार को गृहग्राम ले गए। जबकि बिज्जे के चाचा को शव नहीं दिया गया। ग्राम सरपंच से कहा गया कि उसके वास्तविक माता-पिता को लेकर आएं। बिज्जे के चाचा गंगाराम ने कहा कि पांच साल पहले शादी की बात चल रही थी लेकिन बिज्जे सगाई तोड़कर नक्सल संगठन में चली गई।

इसकी जानकारी दो साल बात बिज्जे ने खुद बुरगुम आकर गंगाराम को बताया था। तब उसे समझाने की कोशिश की गई लेकिन नहीं मारी और आखिर में पुलिस की गोली से मारी गई। कुछ इसी तरह की बात अरनपुर निवासी एलओएस सदस्य देवा की पत्नी जोगी ने भी कहा।

जोगी का कहना था कि पहले वह गांव में ही रहकर नक्सलियों का सहयोग करता रहा। करीब छह माह हो गए बाहर भी जाने लगा था। तब मैंने उसे रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन नहीं माना। जोगी ने कहा कि वह अपने बच्चों को नक्सल पंथ से दूर रखेगी। जोगी का एक पुत्र आश्रम में रहकर दूसरी पढ़ रहा है तथा दूसरा गोद में है।

मुठभेड़ के बाद पुलिस और ग्रामीणों से मिली सूचना के आधार पर अरनपुर निवासी मृत देवा पिता सोमडू, पोलमपल्ली निवासी बिज्जे पिता देवा और नागलगुड़ा के हड़मा मरकाम के परिजन जिला मुख्यालय पहुंचे थे। पहचान के बाद पंचनामा और पोस्टमार्टम के बाद शव सौंप दिया गया। लेकिन बिज्जे का शव उसके कथित चाचा गंगा को नहीं दिया गया।

पुलिस उसकी शिनाख्ती और जवाबों से संतुष्ट नहीं थी। पुलिस रिकार्ड में बिज्जे पोलमपल्ली निवासी है जबकि उसका चाचा बुरगुम का रहने वाला है। साथ आए बुरगुम के सरपंच और ग्रामीण भी पुलिस को संतुष्ट नहीं कर पाए। इसलिए पुलिस ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि बिज्जे के वास्तविक माता-पिता या परिजनों के आने पर शव सुपुर्द किया जाएगा।

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