ट्रैकमेंटेनर को राहत : 5 साल संघर्ष के बाद अब मिलेगा जोखिम भत्ताUpdated: Thu, 10 Aug 2017 09:37 PM (IST)

ट्रैकमेंटेनरों की पांच साल पुरानी मांग पर रेलवे बोर्ड की मुहर लग गई है। अब उन्हें 2 हजार 700 रुपए जोखिम व कठिनाई भत्ता मिलेगा।

बिलासपुर। ट्रैकमेंटेनरों की पांच साल पुरानी मांग पर रेलवे बोर्ड की मुहर लग गई है। अब उन्हें 2 हजार 700 रुपए जोखिम व कठिनाई भत्ता मिलेगा।

बोर्ड ने गुरुवार को इस संबंध में सभी महाप्रबंधकों को आदेश भी जारी कर दिया है। इसका लाभ जोन के 12 हजार ट्रैकमेंटनरों को मिलेगा। ट्रैकमेंटेनर (ट्रैकमैन) रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण अमला है।

इनकी तत्परता से ट्रेनें समय पर और सुरक्षित ढंग से चलती है। बारिश, भीषण गर्मी या फिर कड़ाके की ठंड हो ट्रैकमेंटेनर साल के 365 दिन ट्रैक की सुरक्षा में जुट रहते हैं। इस काम में खतरे की आशंका अधिक रहती है।

कई बार कर्मचारी हादसे का शिकार हो चुके हैं। 2013 में देशभर के ट्रैकमेंटनर एकजुट होकर जोखिम व कठिनाई भत्ता दिए जाने की मांग को लेकर आवाज बुलंद किया था।

पांच साल से मंडल, जोन व केंद्रीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। वहीं रेलमंत्री, प्रधानमंत्री समेत जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी परेशानी रखी।

हालांकि अभी तक केवल आश्वासन ही मिल रहा था। अब सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिश के बाद भारतीय रेलवे के रेलपथ मेंटेंनरों को जोखिम तथा कठिनाई भत्ता देने पर मुहर लग गई है। गुरुवार को बोर्ड ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है।

एक जुलाई से लागू

आदेश में जोखिम व कठिनाई भत्ता देने की अनुशंसा के साथ ही इसे एक जुलाई 2017 से लागू करने का आदेश दिया गया है। मसलन एक महीने के एरियस के साथ अब ट्रैकमेंटेनरों को यह भत्ता भुगतान किया जाएगा।

जोन के कर्मचारियों में उत्साह

रेलवे बोर्ड से भत्ते की मंजूरी के बाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के ट्रैकमेंटेनरों में उत्साह है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कौशिक व महामंत्री संजय कुमार गुप्ता का कहना है कि जोन में पहले ट्रैकमेंटेनरों का एसोएिसशन नहीं था। इसके गठन का मुख्य उद्देश्य ट्रैकमेंटनरों को उनका जायज हक दिलाना है।

इनमें जोखिम व कठिनाई भत्ता भी था। इसके लिए ऑल इंडिया एसोसिएशन के बैनर तले दिल्ली मुख्यालय व जोन तथा रेल मंडल में संघर्ष किया गया।

आज मेहनत सफल हुई। विभागीय परीक्षा में बैठने की मांग पहले ही पूरी हो चुकी है। इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में उत्साह है।

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