ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन प्रवेश का होगा विकल्पUpdated: Sat, 20 May 2017 04:04 AM (IST)

बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि शिक्षण सत्र 2017-18 में ऑनलाइन के साथ आफलाइन प्रवेश का भी विकल्प होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों को आदेश जारी कर इसकी जानकारी दी है। डिजीटल इंडिया के सपने को साकार करने में उच्च शिक्षा विभाग पीछे नजर आ रहा है। सरकारी संस्थाओं में दो साल बाद भी व्यवस्था कायम नहीं हो सकी है। शासन ने इस वर्ष जोर देकर

बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शिक्षण सत्र 2017-18 में ऑनलाइन के साथ आफलाइन प्रवेश का भी विकल्प होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों को आदेश जारी कर इसकी जानकारी दी है।

डिजीटल इंडिया के सपने को साकार करने में उच्च शिक्षा विभाग पीछे नजर आ रहा है। सरकारी संस्थाओं में दो साल बाद भी व्यवस्था कायम नहीं हो सकी है। शासन ने इस वर्ष जोर देकर कहा था कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया अपनाई जाएगी। शिक्षण सत्र आरंभ होने के दस दिन पहले अब सरकारी कॉलेजों को आदेश जारी कर कहा गया है कि ऑनलाइन के साथ आफलाइन का विकल्प भी होगा। इससे स्पष्ट है कि चिप्स की योजना फेल हो चुकी है। लिहाजा बीच में समस्या न हो इसके लिए अब ऑफलाइन की सुविधा दी जा रही है। संयुक्त संचालक डॉ.किरण गजपाल द्वारा जारी आदेश में प्राचार्यों को ई-मेल के जरिए प्रवेश विवरणिका मंगाई गई है। आचानक शासन के चाल बदलने से सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों पर अब दोहरी व्यवस्था की मार होगी। वहीं अनुदान प्राप्त और निजी कॉलेज मनमानी करेंगे। ऑनलाइन प्रवेश न देकर ऑफलाइन आवेदन जमा लेंगे। इससे छात्रों को सीधा नुकसान होगा। दबावपूर्ण तरीके से मनमाना फीस वसूल सकेंगे।

यूजीसी गाइडलाइल का उल्लंघन

बिलासपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कुल 168 कॉलेज हैं। विगत दो साल से ऑनलाइन प्रवेश को लेकर कवायद चल रही है। चिप्स कंपनी के द्वारा तकनीकी दिक्कत के कारण पिछले साल भी यही स्थिति उत्पन्न हुई थी। पंजीयन की प्रक्रिया पूरा कर कॉलेजों के भरोसे छोड़ दिया गया था। लिहाजा सीट खाली होने के बाद भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यूजीसी ने अपने सकुर्लर में स्पष्ट किया है कि उच्च शिक्षण संस्थाओं को प्रवेश से संबंधित सारी जानकारी और फीस को लेकर मेन गेट के सामने बैनर लगाकर जागरूक करना है। अधिकांश संस्थाएं इसका उल्लंघन कर रहे हैं।

शासन ने सरकारी कॉलेजों में ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रवेश दोनों विकल्प देने का निर्णय लिया है। इससे छात्रों को फायदा होगा। ग्रामीण और दूरस्थ अंचल में रहने वाले छात्रों को दिक्कत नहीं आएगी। शत प्रतिशत ऑनलाइन पर थोड़ा समय लगेगा। चिप्स की निगरानी में प्रक्रिया चल रही है।

डॉ.एचएस होता

अधिष्ठाता,छात्र कल्याण

बिलासपुर विश्वविद्यालय

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.