एटीआर में गौरैया की खोज, दिखते ही कैमरे में कैद होगी तस्वीरUpdated: Mon, 11 Apr 2016 04:00 AM (IST)

बिलासपुर(निप्र)। गौरैया के संरक्षण को लेकर अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन आगे आया है। सबसे पहले अमला यह खोज करेगा कि टाइगर रिजर्व के किस क्षेत्र में गौरैया चहकती है। उसके नजर आते ही तस्वीर ली जाएगी। इसके साथ-साथ ग्रामीणों की मदद से संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एक समय नन्हीं गौरैया घर व आंगन को चहकाती थी। करीब 10 सालों से यह प

बिलासपुर(निप्र)। गौरैया के संरक्षण को लेकर अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन आगे आया है। सबसे पहले अमला यह खोज करेगा कि टाइगर रिजर्व के किस क्षेत्र में गौरैया चहकती है। उसके नजर आते ही तस्वीर ली जाएगी। इसके साथ-साथ ग्रामीणों की मदद से संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

एक समय नन्हीं गौरैया घर व आंगन को चहकाती थी। करीब 10 सालों से यह पक्षी शहरी इलाकों से विलुप्त हो गई है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में कभी- कभार चहचहाहट सुनाई देती है। उनकी मौजूदगी से यह तो स्पष्ट है कि पक्षी पूरी तरह विलुप्त नहीं हुई है। ' नईदुनिया' ने प्यारी गौरैया के लिए एक पहल की। उन्हें फिर से बुलाने पक्षी प्रेमियों से फोटो, किस्से, पेंटिंग, कविता, कहानियां आमंत्रित की। 'लौट आओ गौरैया' को अब सराहना भी मिल रही है। अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन इनके संरक्षण के लिए आगे आ रहा है। टाइगर रिजर्व में इन पक्षियों की चहचहाहट है। हालांकि प्रबंधन भी इस बात को मान रहा है कि पहले इस क्षेत्र में पक्षियों अधिक संख्या में नजर आती थीं। अब कम ही सुनाई देती हैं। प्रबंधन गौरैया को संरक्षित करने का निर्णय लिया है। सोमवार को सहायक संचालक कार्यालय से सभी रेंज छपरवा, लमनी, अचानकमार व सुरही के परिक्षेत्र अधिकारियों को निर्देश दिया जाएगा कि वह मैदानी अमले से गौरैया की खोज कराएं। जिस रेंज के जिस बीट में गौरैया नजर आती है, उसे बकायदा दर्ज किया जाए। इससे उस क्षेत्र की पहचान हो सकती है, जहां गौरैया पाई जाती है। इसके अलावा पक्षियों की तस्वीर भी कैमरे में कैद होगी। इसके साथ रेंज के अंतर्गत आने वाले गांव के बुजुर्ग ग्रामीणों से चर्चा कर यह जानने की कोशिश करेंगे गौरैया कम क्यों हो गईं। पहले किस स्थान पर बड़ी संख्या में नजर आती थीं। ग्रामीणों से यह सुझाव भी लिया जाएगा कि उनके संरक्षण के लिए क्या किया जा सकता है।

एटीआर में नहीं है मोबाइल टॉवर

गौरैया पक्षी के विलुप्त होने का एक बड़ा कारण मोबाइल टॉवर माना जाता है। मोबाइल के किरणों से इनकी पीढ़ी पर प्रभाव पड़ा। यह परेशानी शहरी क्षेत्रों में हैं। टाइगर रिजर्व में न बिजली है और न ही मोबाइल टॉवर। प्रबंधन यह सोच रहा है कि जब मोबाइल टॉवर ही नहीं है, तो टाइगर रिजर्व में इन पक्षियों की संख्या क्यों कम हो गई। प्रबंधन यह भी जानने की कोशिश करेगा।

'नईदुनिया' की पहल प्रशंसनीय

अचानकमार टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक एसके शर्मा का कहना है कि 'लौट आओ गौरैया ' शीर्षक देकर ' नईदुनिया' ने जो पहल की है, वह काफी प्रशंसनीय है। लोग इस पक्षी को भूल चुके थे। नई पीढ़ी तो इससे पूरी तरह अनभिज्ञ है। इस पहल से लोगों में गौरैया के संरक्षण लेकर जागरूकता आएगी। टाइगर रिजर्व प्रबंधन इस पक्षी को संरक्षित करने की कोशिश करेगा। इसके लिए मैदानी अमले को निर्देश दिया जाएगा कि वह जंगल में इन पक्षी की खोज करें। नजर आने पर गौरैया की तस्वीर लेंगे। ग्रामीणों से भी सहयोग लिया जाएगा। उनसे सुझाव मांगे जाएंगे।

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