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स्वच्छता में टॉप टेन में बाहर हुआ बिलासपुर स्टेशनUpdated: Thu, 18 May 2017 03:59 AM (IST)

पिछले सर्वे में तीसरा सबसे स्वच्छ स्टेशन का खिताब जीतने वाला बिलासपुर रेलवे स्टेशन इस बार टॉप टेन में भी जगह नहीं बना सका।

बिलासपुर। पिछले सर्वे में तीसरा सबसे स्वच्छ स्टेशन का खिताब जीतने वाला बिलासपुर रेलवे स्टेशन इस बार टॉप टेन में भी जगह नहीं बना सका। जबकि अधिकारियों को पहला या दूसरा स्थान मिलने की उम्मीद थी। इससे रेल प्रशासन को झटका लगा है। देश के 75 ए-1 स्टेशनों में जोनल स्टेशन को 29वां नंबर मिला है।

स्वच्छ भारत, स्वच्छ रेल अभियान के तहत भारतीय रेलवे ने 2016 में विशेष पहल की थी। आईआरटीसी को देश के सभी स्टेशनों की स्वच्छता सर्वे की जवाबदारी सौंपी गई। सर्वे रिपोर्ट में बिलासपुर स्टेशन को देश का तीसरा सबसे स्वच्छ स्टेशन घोषित किया गया।

400 से अधिक स्टेशनों में नंबर तीन पर आना बड़ी कामयाबी थी। इस बार पहले या दूसरे स्थान के लिए रेल प्रशासन जुटा हुआ था। यह तैयारी इस साल होने वाले सर्वे को लेकर थी। रेल मंत्रालय ने देश के ए-1 व ए श्रेणी के स्टेशनों की सफाई का सर्वे करने की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को सौंपी।

आईआरसीटीसी ने क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया को यह काम दिया। डेढ़ महीने पहले दो सदस्यीय सर्वे टीम ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर, रायपुर, चांपा, रायगढ़, दुर्ग व राजनांदगाव का निरीक्षण किया। इस दौरान जांच के बिंदुओं को परखा गया। इनमें प्लेटफार्म, टॉयलेट, पार्किंग व सर्कुलेटिंग एरिया शामिल थे।

एक स्टेशन में टीम ने तीन से चार दिन जांच की। इस दौरान यात्रियों का फीडबैक में लिया गया। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर फाइनल रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपी गई। इस स्वच्छता ऑडिट रिपोर्ट में ए-1 श्रेणी के स्टेशनों में विशाखापट्टनम अव्वल रहा। बिलासपुर को 29वां स्थाल मिला है।

वहीं ए श्रेणी के स्टेशनों में व्यास स्टेशन ने बाजी मारी। रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा रिपोर्ट पेश करते ही इस श्रेणी के सभी स्टेशनों के अधिकारी व कर्मचारियों में पोजिशन जानने की होड़ मच गई। जोनल स्टेशन भी इनमें शामिल है। यह ज्यादा उत्कुता इसलिए थी कि पिछली बार तीसरा स्थान हासिल हुआ था।

इस बार पहले या दूसरे स्थान की उम्मीद थी। लेकिन दोनों श्रेणी में जोन का कोई भी स्टेशन टॉप टेन में शामिल नहीं हो सका। इससे उत्कुता उदासी में बदल गई। हालांकि एक बड़ी खुशी जोन प्रथम स्थान मिलने की है।

सफाई पर सालाना खर्च होता है 3 करोड़

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जोनल स्टेशन को साफ-सुथरा रखने के लिए भारी-भरकम खर्च किया जाता है। तीन साल में 9 करोड़ खर्च होता है। इस लिहाज से एक साल के लिए 3 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 182 कर्मचारी व सफाई की 4-5 मशीनें स्टेशन को साफ-सुथरा रखने के लिए मेहनत करते हैं।

वहीं रायपुर स्टेशन में तीन साल में 12 करो़ड़ खर्च किए जाते हैं। चांपा, रायगढ़ , दुर्ग व राजनांदगांव में भी सफाई के नाम आर्थिक दिक्कत नहीं है। इसके बाद भी स्थान प्राप्त नहीं होने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। जाहिर है कि अब खामियां भी ढूंढी जाएंगी। इससे अगले साल के सर्वे में अच्छा स्थान मिल सके। मालूम हो कि इस बार रायपुर की स्थिति सुधरी है। पिछले साल यह स्टेशन देश के 10 गंदे स्टेशनों की सूची में शामिल था।

इस बार सर्वे का तरीका बदला है। पिछली बार जिन्हें स्थान मिला है, उन्हें इस बार शामिल नहीं किया गया। इस बार जोन स्तर पर स्वच्छता का आकंलन किया गया। इसमें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रथम स्थान पर है। यह बड़ी उपलब्धि है। - संतोष कुमार, सीनियर पीआरओ, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे

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