छत्तीसगढ़ के अभ्यारणों में भगवान भरोसे पल रहे बाघUpdated: Thu, 28 Sep 2017 06:37 PM (IST)

बंगाल टाइगर समेत तमाम संरक्षित वन्य जीवों से भरा यह अभयारण्य इन दिनों अफसरों से खाली है।

बिलासपुर (शिव सोनी)। साल के सलोने वृक्षों और तमाम तरह के पेड़-पौधों से आच्छादित अचानकमार टाइगर रिजर्व की हालत इन दिनों पतली होती जा रही है। बंगाल टाइगर समेत तमाम संरक्षित वन्य जीवों से भरा यह अभयारण्य इन दिनों अफसरों से खाली है।

नतीजा है कि टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों की ठीक से देखभाल नहीं हो पा रही। ऐसे में शिकारियों के पैने दांत गड़ाने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इस अभयारण्य में वन्य जीव भले ही दहाड़ रहे हों पर सरकार मौन है। अफसरों की तैनाती के जतन अभी तक नहीं हो सके हैं।

बिना प्रभारियों के चल रहे रेंज

टाइगर रिजर्व संरक्षित वनक्षेत्र के साथ ही संवेदनशील होते हैं। इसकी सुरक्षा के लिए कोर व बफर, दो तरह के जोन बनाए गए हैं। वन्यप्राणियों की गतिविधियां कोर जोन में ही अधिक होती हैं। इसके बाहर का एरिया बफर क्षेत्र कहलाता है।

अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोर जोन में चार रेंज अचानकमार, छपरवा, सुरही व लमनी और बफर में लोरमी, कोटा व केंवची हैं। इस लिहाज से सभी में रेंजरों की पोस्टिंग होनी चाहिए। लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। छपरवा, लमनी व कोटा बफर को छोड़कर बाकी के रेंज बिना प्रभारियों के चल रहे हैं।

मैदानी अमला भी बेलगाम

उच्च अधिकारियों ने यहां पदस्थ अफसरों पर अतिरिक्त रेंज की जवाबदारी भी सौंप दी है। इस कारण वे अपनी पोस्टिंग वाली रेंज का काम भी ठीक से नहीं देख पा रहे। केंवची में रेंज बनने के बाद से ही किसी की पोस्टिंग नहीं हुई है। इन रिक्त पदों को भरने के लिए अकिारी भी रुचि नहीं दिखा रहे।

हाल यह है कि परिक्षेत्र अधिकारी न होने से मैदानी अमला भी बेलगाम है। ऐसे में जंगल और उनमें चरने और विचरने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चिंता की बात तो यह है कि अधिकारियों की तैनाती नहीं की जा रही। उल्लेखनीय है कि एक नवंबर से कोटा रेंज भी रेंजर विहीन हो जाएगा। यहां पदस्थ सुनील शर्मा 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अभी तक शर्मा केंवची रेंज का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

टाइगर रिजर्व में कुल 12 बाघ

2014 की गणना के अनुसार अचानकमार टाइगर रिजर्व में कुल 12 बाघ हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से चार साल में एक बार टाइगर रिजर्व के बाघों की गणना की जाती है। सन 14 की गणना में बाघों की संख्या एक दर्जन के करीब है। अब 2018 में दोबारा से गणना होगी। इस अभयारण्य में बंगाल टाइगर नामक प्रजाति पाई जाती है।

छत्तीसगढ़ में तीन टाइगर रिजर्व

- अचानकमार-बिलासपुर

- उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व गरियाबंद

- इंद्रावती-जगदलपुर

फैक्ट फाइल

अचानकमार का कुल क्षेत्रफल - 914 वर्ग किमी

कोर जोन - 649 वर्ग किमी

बफर जोन - 265 वर्ग किमी

रेंज - 07

प्रजाति रायल बंगाल टाइगर

बाघ के अलावा ये भी वन्यजीव

अचानकमार अभयारण्य में बाघ के अलावा चीतल, भालू, तेंदुआ, पट्टीदार हाइना, धारीदार लकड़बग्घा, स्लाथबीयर, ट्रेगोकेमेलस, ब्लैक बक, नीलगाय, चिंकारा, केनिस ओरियस, जंगली सूअर, नीलगाय, काकड़ और सांभर भी पर्याप्त संख्या में हैं।

इनका कहना है

पूरे छत्तीसगढ़ में रेंजरों की कमी है। इसका असर अचानकमार टाइगर रिजर्व पर भी पड़ रहा है। समय-समय पर इस कमी से शासन को अवगत भी कराया जाता है। जल्द डिप्टी रेंजरों का प्रमोशन होने वाला है। इससे टाइगर रिजर्व समेत अन्य वनमंडलों में रेंजरों की कमी दूर होगी। रही बात जंगल व वन्यप्राणियों की सुरक्षा की तो इस पर कुछ खास असर नहीं पड़ रहा है। टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर समेत असिस्टेंट डायरेक्टर नियुक्त हैं। वे खुद मानीटरिंग करते हैं। साथ ही मैदानी अमले पर भी निगरानी रखते हैं - आरके सिंह, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ छत्तीसगढ़

टाइगर रिजर्व के रेंज खाली हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पदस्थ रेंजरों को ही दूसरे रेंज की जवाबदारी सौंपी गई है। रेंजर नहीं रहने से कामकाज पर प्रभाव तो पड़ता है। लेकिन पोस्टिंग तो शासन को करनी है। इस संबंध में विभाग की ओर से शासन को अवगत कराया गया है - मनोज कुमार पांडेय, डिप्टी डायरेक्टर, अचानकमार टाइगर रिजर्व

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