OMG! स्‍टेशन पर आई ट्रेन जिसके नाम के बारे में किसी को नहीं था पताUpdated: Tue, 12 Sep 2017 03:59 AM (IST)

दोपहर 1.30 बजे प्लेटफार्म 6 में एक ऐसी ट्रेन आकर खड़ी हुई जिसमें नाम ही नहीं था। इसे रेलवे की बड़ी लापरवाही बताया जा रहा है।

बिलासपुर। दोपहर 1.30 बजे प्लेटफार्म 6 में एक ऐसी ट्रेन आकर खड़ी हुई जिसमें नाम ही नहीं था। इसे रेलवे की बड़ी लापरवाही बताया जा रहा है। साथ ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसमें चढ़ने से पहले यात्रियों में किस तरह की स्थिति रही होगी।

जिस समय यह ट्रेन प्लेटफार्म पर आकर खड़ी हुई नईदुनिया की टीम मौजूद थी। साथ ही जानने की कोशिश की गई कि यह कौन सी ट्रेन है। इंजन के बाद के कोच में बोर्ड नहीं लगा था। एक के बाद एक पूरे 9 कोच को खंगाला गया। लेकिन एक भी कोच में बोर्ड नहीं लगा था। इस बीच ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों से पूछा गया। तब उन्होंने इसका नाम पेंड्रारारोड-बिलासपुर मेमू लोकल बताया। यह यात्री पेंड्रा से इस ट्रेन में बिलासपुर आने के लिए सवार हुए थे। वहीं कुछ यात्री पेंड्रा के बाद के स्टेशनों से इसमें चढ़े। जब उनसे पूछा गया कि इसमें तो नाम ही लगा है।

तब उन्होंने बताया कि स्टेशन में पहुंचने के बाद उनके मन में भी इस ट्रेन को लेकर असमंजस की स्थिति थी। इसके चलते थोड़ी देर के लिए कदम रुक गए। उन्होंने बताया कि ट्रेन में चढ़ने से पहले कोच में बैठे यात्रियों से इसके बारे में जानकारी ली गई। जब उन्होंने बताया कि यह ट्रेन बिलासपुर जाएगी तब जाकर इसमें चढ़े हैं। हालांकि कुछ नियमित यात्री भी मिले।

जिन्होंने यह कहा कि यह ट्रेन प्रतिदिन चलती है और पेंड्रा से छूटने के बाद आगे के सभी स्टेशनों में अपने तय प्लेटफार्म पर आकर खड़ी होती है। नियमित यात्री होने के कारण उन्हें इस ट्रेन का अंदाजा था। इसी अनुमान के आधार पर उन्होंने यात्रा शुरू की है। हालांकि नाम को लेकर उन्होंने भी नाराजगी जताई और कहा कि ज्यादा यात्री ट्रेन के नाम, कहां तक जाएगा , समय आदि को लेकर असमंजस की स्थिति में रहते हैं। इनमें वे यात्री होते हैं जो बहुत कम ही ट्रेन से यात्रा करते हैं। ऐसे यात्रियों के लिए कोच में लगा बोर्ड ही पहचान का आधार होता है।

- हर कोच में नजर आया विज्ञापन

इस ट्रेन के प्रत्येक कोच के हर हिस्से में अलग- अलग विज्ञापन लगे हुए थे। इसके चलते ट्रेन की वास्तविक स्वरूप ही नहीं दिख रही थी। विज्ञापन पोस्टरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेलवे यात्री सुविधा से ज्यादा विज्ञापन से कमाई करने में दिलचस्पी ले रही है।

ट्रेनों में नाम का बोर्ड तो अनिवार्य है। यह गलती कैसे हुई जांच कर पता लगाया जाएगा। संबंधित विभाग को तत्काल इसकी सूचना दी जाएगी।

संतोष कुमार, सीनियर पीआरओ, दूपमरे जोन

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