नक्लसियों के गढ़ में नहीं अब दहशत, बंदूक थामने की बजाए ये करना चाह रहे है युवाUpdated: Mon, 13 Nov 2017 07:14 AM (IST)

नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले रावघाट से युवाओं की टोली अब जिंदगी जीना चाहती है।

भिलाई। नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले रावघाट से युवाओं की टोली अब जिंदगी जीना चाहती है। बेहतर जीवनयापन की चाहत लिए बीएसपी के रावघाट प्रोजेक्ट से युवा जुड़ रहे हैं। किसी जमाने में दहशत के साये में रावघाट था, अब वहां खुशहाली की चाहत समेटे ग्रामीण काम करने के लिए बाहर निकल रहे हैं।

रावघाट प्रोजेक्ट के तहत रेल लाइन बिछाने, सुरक्षा कर्मियों के कैम्प आदि में काम करने वालों को बेहतर जिंदगी की आहट मिल चुकी है। यही वजह है कि घने जंगल और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बाद भी यहां कोई अनहोनी नहीं हुई। वजह साफ है, ग्रामीणों को तरक्की से रोकने वालों के हौसले पस्त हो रहे हैं। बीएसपी और खनन करने वाली निजी कंपनी भी मानती है कि वहां सुरक्षा का मुद्दा अब बनता ही नहीं है।

पिछले तीन साल से हालात बदल चुके हैं। प्रोजेक्ट की प्लानिंग और सर्वे की वजह से थोड़ी देरी हो रही है। सुरक्षा कारणों से रावघाट में खनन में लेटलतीफी नहीं है। बीएसएफ और एसएसबी के जवानों ने मोर्चा संभालने के साथ ही ग्रामीणों की जिंदगी में बदलाव के लिए पढ़ाई से लेकर रोजगार की संभावनाओं से जोड़ रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र सालेभाट, सरगीपाल आदि गांवों की महिलाएं बच्चों को लेकर स्कूल तक पहुंच रही है। यही सबसे बड़ा बदलाव का कारण दिख रहा है। साथ ही जहां से ग्रामीण आते हैं, वहां कोई अनहोनी होने की संभावना वैसे ही खत्म हो जाती है।

2007 के बाद अब दोबारा होगी रावघाट में मार्किंग

बीएसपी ने साल 2007 में रावघाट का सर्वे किया था। किस प्लांट को कहां सेट करना है, यह सब कागजों पर तय किया गया था। इसके बाद से यहां सर्वे नहीं हुआ था। खनन के लिए प्राइवेट कंपनी ने ठेका लेने के बाद सर्वे शुरू कर दिया है। ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है, किस प्लांट को कहां और कितने दायरे में रखा जाएगा। कागज पर तैयार ड्राइंग और डिजाइन के आधार पर प्लानिंग को मूर्तरूप दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि करीब छह माह के भीतर पूरी प्रक्रिया को कर लिया जाएगा।

प्लानिंग में न हो चूक, इसलिए काम भरपूर

ठेका लेने वाली कंपनी के अधिकारी बताते हैं कि खनन का प्लान नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। बार-बार प्लानिंग में बदलाव की नौबत न आए, इसलिए पहले चरण में ही बेहतर तरीका अपनाया जा रहा है। भविष्य की संभावनाओं और काम करने के तौर-तरीके व दिक्कतों का अध्ययन किया जा रहा है। एक बार प्लान को लागू करने के बाद उसमें किसी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि प्रोजेक्ट को शुरू करने में थोड़ी देर हो रही है। सुरक्षा कारणों से काम में दिक्कत नहीं है।

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