यहां संस्कृत होगी बोलचाल की भाषा, ऐसे हो रहे प्रयासUpdated: Mon, 09 Oct 2017 01:21 AM (IST)

जनभाषा केन्द्र गांवों और बस्तियों में शुरू की जा रही है। यहां किसी भी सार्वजनिक भवन में यह केन्द्र हर दिन शाम को दो से तीन घंटे चलेगा।

दुर्ग, भिलाई । अब वह दिन दूर नहीं जब लोग बोलचाल की भाषा में संस्कृत का इस्तेमाल करेंगे। संस्कृत को आम भाषा बनाने के लिए दुर्ग जिले में 20 जनभाषा केन्द्र खोले जा रहे है। प्रदेश में दुर्ग जिले में इसकी शुरुआत पहली बार की जा रही है।

संस्कृत विद्यामंडलम्‌ और जिला शिक्षा विभाग ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस जनभाषा केन्द्र की कार्ययोजना जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे और संस्कृत विद्यामंडलम्‌ के सदस्य आचार्य नीलेश शर्मा ने तैयार की है। शिक्षामंत्री केदार कश्यप के समक्ष कार्य योजना का प्रस्ताव दिया गया था।

प्रस्ताव को मंत्री ने अनुशंसित कर विद्यामडलम्‌ को भेजी। इन केन्द्रों में दुर्ग जिला शिक्षा विभाग के संस्कृत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की खास भूमिका रहेगी। दुर्ग जिले के 186 संस्कृत शिक्षकों में से ऐसे 22 शिक्षकों का चयन किया गया है, जिन्हें संस्कृत में महारत हासिल है। खास बात यह है कि ये शिक्षक समाजसेवी के रूप में जनभाषा केन्द्र का संचालन करेंगे और कोई शुल्क नहीं लेंगे।

आगच्छतु, उपविशतु जैसे बोलचाल की होगी भाषा

जनभाषा केन्द्र में बोलचाल की भाषा इस तरह लोगों को सिखाई जाएगी। मसलन आइए को आगच्छतु कहेंगे। बैठिए को उपविशतु, नमस्कार को नमोनमः, धन्यवाद को धन्यवादः, खाईए को खादतु, ग्रहण कीजिए को स्वीकारयतु जैसे बोलचाल भाषा होगी।

आसपास के बच्चे, युवा हो या कोई भी व्यक्ति उन्हें इस केन्द्र से जोड़ेंगे और संस्कृत के ऐसे ही शब्दों की सीख देंगे। जनभाषा केन्द्र गांवों और बस्तियों में शुरू की जा रही है। यहां किसी भी सार्वजनिक भवन में यह केन्द्र हर दिन शाम को दो से तीन घंटे चलेगा।

चयनित संस्कृत शिक्षक इन केन्द्रों को ऐसे युवक के सौंप देंगे जो इसका नियमित व बेहतर संचालन आगे करता रहे। संस्कृत शिक्षक फिर दूसरी जगह केन्द्र शुरू करेंगे। यह सतत प्रक्रिया चलती रहेगी और लोगों के बीच इस तरह संस्कृत प्रचलन में आता रहेगा।

इन स्थानों पर संस्कृत जनभाषा केन्द्र

तिलक स्कूल दुर्ग, बोरई, खुर्सीपार, रिसाली भिलाई, बोरसी दुर्ग, वैशालीनगर भिलाई, मेड़ेसरा, जामुल, अंजोराख, कुरूद, सेलूद, जामगांव आर, खुड़मुड़ी, जामगांव एम, भनसुली, बिरेझर, बोरी, रानीतराई, ओदरहागहन, खपरी, लिटिया में संस्कृत जनभाषा केंद्र खुलेंगे।

जनभाषा केन्द्र खुलने से होंगे और भी फायदे

- ग्यारहवी और बारहवी में संस्कृत वैकल्पिक विषय होने के बाद दसवीं उत्तीर्ण 70 प्रतिशत बच्चे यह विषय छोड़ देते हैं।

-वर्तमान में दुर्ग जिले में 6 शासकीय संस्कृत विद्यालय चल रहे है। जहां वर्तमान में 385 विद्यार्थी पढ़ते हैं।

-छठवी से दसवीं तक सभी विद्यार्थी संस्कृत विषय अनिवार्य रूप से पढ़ रहे है। जिले में करीब एक लाख विद्यार्थी इस विषय को पढ़ रहे है।

बढ़ेगा रुझान

'संस्कृत काफी सरल भाषा है और खासकर विद्यार्थियों के लिए तो यह स्कोरिंग सबजेक्ट है। जनभाषा केन्द्र खोलने से संस्कृत के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा और वे बच्चों को प्रेरित करेंगे।' - आशुतोष चावरे, जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग

प्रशिक्षण देंगे

'चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। ये स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जनभाषा केन्द्र का संचालन भी आम लोगों के हाथों में होगा। प्रदेश में यह पहली शुरुआत है, जो दुर्ग जिले से की जा रही है।' - आचार्य नीलेश शर्मा, सदस्य, संस्कृत विद्यामंडलम छत्तीसगढ़

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