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वीडियो : 41 घंटे बाद मादा हाथी को दो क्रेन के सहारे कुएं से निकालाUpdated: Tue, 14 Nov 2017 03:19 PM (IST)

कानन पेंडारी से वन्य जीव चिकित्सक और विशेषज्ञ डॉ. चंदन के नेतृत्व में एक विशेष टीम भी मौके पर पहुंची है।

अंबिकापुर । सूरजपुर वन मंडल के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवाधक्की में रविवार रात 20 फीट गहरे कुएं में गिरी मादा हाथी को आपरेशन पद्मावती चलाकर वन विभाग की टीम ने लगभग 41 घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। एसईसीएल की दो क्रेन के सहारे मादा हाथी को कुएं से लिफ्ट कर बाहर निकाला गया।

मौके पर मौजूद वन्य जीव विशेषज्ञों व पशु चिकित्सक ने हाथी का प्राथमिक उपचार किया। ट्रक में लोड़कर मादा हाथी को रमकोला के नजदीक हाथी बचाव व पुनर्वास केंद्र में रखा गया है। वन विभाग की टीम वन्य जीव विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप हाथी की देखभाल में लगी है।

उल्लेखनीय है कि रविवार की रात लगभग आठ से नौ बजे के बीच एक मादा हाथी नवाधक्की गांव में स्कूल के पास लगभग 20 फीट गहरे कुएं में गिर गई थी। इस दल में कुल 13 हाथी शामिल थे। मादा हाथी के कुएं में गिरने के बाद शेष बचे हाथियों द्वारा चिंघाड़ लगाने पर गांव वालों को इस घटना की जानकारी लगी थी।

रविवार रात लगभग नौ बजे से वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर निगरानी में लगी हुई थी। सोमवार सुबह से मादा हाथी को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया गया था। दो जेसीबी से कुएं के पास रास्ता बनाया गया था ताकि मादा हाथी आसानी से उससे निकल सके।

मादा हाथी के नहीं निकलने पर स्पष्ट हो गया था कि उसे चोट है। कमर के नीचे पेल्विक बोन टूट जाने से हाथी के बाहर नहीं निकल पाने से सोमवार रात आठ बजे रेस्क्यू आपरेशन बंद कर दिया गया था। मंगलवार सुबह वन संरक्षक केके बिसेन के नेतृत्व में कुएं में गिरे मादा हाथी को बाहर निकालने आपरेशन 'पद्मावती' की शुरुआत की गई।

कानन पेंडारी बिलासपुर के वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार चंदन, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा. सीके मिश्रा को साथ लेकर वन विभाग के लगभग 200 अकिारियों-कर्मचारियों की टीम आपरेशन पद्मावती में जी जान से जुटी रही। एसईसीएल से दो क्रेन मंगाई गई। कनवेयर बेल्ट की व्यवस्था की गई।

भीड़ को नियंत्रित कर कनवेयर बेल्ट को हाथी में दो जगहों पर लपेट दोनों क्रेन के सहारे उसे लिफ्ट कर लिया गया। उपर लाने के बाद चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच व उपचार की। थोड़ी देर बाद पहले से तैयार ट्रक में लोड़कर सीधे रमकोला से लगे तैमोर पिंगला अभयारण्य क्षेत्र में निर्माणाधीन हाथी बचाव व पुनर्वास केंद्र ले जाया गया।

यहां चिकित्सकों ने वृह्द रूप से उसकी जांच की और आवश्यक इंजेक्शन व दवाएं देने के बाद वापस लौटे। वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को हाथी की निगरानी में लगाया गया है। महावतों की टीम भी मौके पर तैनात की गई है। वन्य जीव विशेषज्ञ व पशु चिकित्सकों के सलाह अनुरूप मादा हाथी को रखा गया है। मंगलवार को उसे खुले में रखा गया है। बुवार को हाथी के चारों ओर एलिफेंट प्रूफ ट्रेंच बनाया जाएगा ताकि उसके भीतर वह पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।

ऐसे चला आपरेशन पद्मावती

जिस कुएं में मादा हाथी गिरी थी, वहां तक पहुंचने सोमवार को जेसीबी के सहारे रास्ता बनाया गया था। चूंकि हाथी उठ पाने में सक्षम नहीं थी, इसलिए तय था कि वह इंसानों को किसी प्रकार से कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी, इसलिए वहां आनाजाना आसान था।

वन्य जीव विशेषज्ञ डा. चंदन व वन विभाग के आला अधिकारियों के मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम ने मोटे रबर का कनवेयर बेल्ट मौके पर मंगाया। कुएं में गिरी मादा हाथी के आगे पैर के पीछे व पीछे पैर के आगे हिस्से पर कनवेयर बेल्ट का लूप फंसाया गया।

इधर कुएं के नजदीक खड़े दोनों क्रेन के लूपों को नीचे गिराया गया। मादा हाथी पर फंसाए गए कनवेयर बेल्ट के दोनों लूपों को एक-एक क्रेन के लूप में सुरक्षित तरीके से फंसाया गया। यहीं पर तकनीक की आवश्यकता थी, क्योंकि दोनों क्रेन को एक साथ लिफ्ट करना जरूरी था अन्यथा हाथी को चोट लग सकती थी।

एक ही स्पीड से दोनों क्रेन के लूप को उपर चढ़ाने का काम शुरू किया गया। धीरे धीरे लूप में फंसकर हाथी भी उपर आ गया। पहले से मुस्तैद वन्य जीव विशेषज्ञों व पशु चिकित्सकों ने तत्काल उसका उपचार कर दर्द निवारक दवाएं दी ताकि उसे राहत मिल सके।

ट्रक में लोडकर ले जाना पड़ा रेस्क्यू सेंटर

नवाधक्की के जिस स्थान पर हथिनी कुएं में गिरी थी, उसके आसपास उसे रख उपचार करना आसान नहीं था, क्योंकि नजदीक के जंगल में दल के दूसरे सदस्यों की मौजूदगी है, इसलिए कुएं से बाहर निकालने के बाद उसे ट्रक में लोडकर पहले रेवटी वन परिसर ले जाया गया। लेकिन यहां अनुकूल माहौल नहीं था, जिसे देखते हुए मुख्य वन संरक्षक केके बिसेन के साथ वन विभाग की टीम मादा हाथी को साथ लेकर सीधे रमकोला के नजदीक निर्माणाधीन हाथी बचाव व पुनर्वास केंद्र ले गई। यहीं पर रखकर उसका उपचार किया जा रहा है। आने वाले कई दिनों तक उसे यहीं रखा जाएगा।

नहीं पड़ी ट्रेंक्यूलाइज करने की जरूरत

लगभग 20 फीट गहरे कुएं में मादा हाथी पीछे की ओर से गिरी थी, इसलिए कमर में गंभीर चोट से वह उठ पाने में सक्षम नहीं थी। जंगली मादा हाथी की आयु लगभग 10 से 12 वर्ष की है। एडल्ट मादा हाथी को बाहर निकालने के लिए उसे ट्रेंक्यूलाइज करने की भी आवश्यकता महसूस नहीं की गई। यदि वह उठ पाने में सक्षम होती तो इंसानों को देखते ही हमला करती। ऐसे में उसे ट्रेंक्यूलाइज करना जरूरी पड़ता, लेकिन जब वह उठ ही नहीं पा रही थी तो वन जीव विशेषज्ञों और वन अधिकारियों-कर्मचारियों को भी पता चल गया था कि रेस्क्यू आपरेशन में घायल मादा हाथी से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

200 से अधिक कर्मचारी किए गए थे तैनात

लगभग 24 घंटे के आपरेशन में मादा हाथी को कुएं से बाहर निकालने सफलता नहीं मिल पाने पर वन विभाग की चिंता बढ़ गई थी। ज्यादा समय तक मादा हाथी के सकरे कुएं में गिरे रहने से कुछ भी हो सकता था। ऐसे में मंगलवार को यह तय किया गया कि वन्य जीव विशेषज्ञों की सलाह अनुरूप रेस्क्यू आपरेशन चलाया जाएगा।

सूरजपुर डीएफओ बीपी सिंह के साथ सूरजपुर वन मंडल के सभी एसडीओ, रेंजरों के अलावा लगभग 200 वन अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम के अलावा पुलिसकर्मियों को रेस्क्यू आपरेशन में लगाया गया था। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ भीड़ को नियंत्रित करने में लगे हुए थे तो कई की ड्यूटी संसाधनों की उपलब्धता के लिए लगाई गई थी। हाथी के नजदीक जाकर रबर के कन्वेयर बेल्ट को फंसाने के लिए भी प्रशिक्षित वनकर्मियों को तैनात किया गया था। सभी ने अपना कार्य किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि समन्वय से राह आसान हुई और हाथी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

गृहमंत्री ने भी रेस्क्यू आपरेशन का लिया जायजा

ग्राम नवाधक्की के जिस कुएं में मादा हाथी गिरी थी, वह बनारस मुख्यमार्ग के नजदीक ही है। मंगलवार दोपहर गृहमंत्री रामसेवक पैकरा वाड्रफनगर के लिए निकले थे। वाड्रफनगर जाने से पहले वे मादा हाथी को कुएं से निकालने चल रहे रेस्क्यू आपरेशन का जायजा लिया। मौके पर मौजूद वन अधिकारियों ने आॅपरेशन के संबंध में गृहमंत्री को पूरी जानकारी दी और यह बताया कि कैसे हाथी को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।

दीर्घकालीक उपचार की पड़ेगी जरूरत

मादा हाथी का इलाज करने वाले वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सीके मिश्रा ने बताया कि हाथी के सामने के दोनों पैर पूरी तरीके से ठीक हैं। इन दोनों पैरों में वह मूवमेंट भी कर पा रही है, लेकिन कमरे व पीछे के पैरों में आई चोट से पीछे के दोनों पैर काम नहीं कर रहे हैं, जिस कारण वह उठ नहीं पा रही है। उन्होंने बताया कि हाथी पूरी तरह से स्वस्थ है। वह भोजन भी कर रही है। गन्ना, गुड़ के साथ उसे पीपल की पत्तियां भी खाने के लिए दी जा रही हैं। मादा हाथी को पूरी तरीके से स्वस्थ होने में थोड़ा वक्त लगेगा। लंबे इलाज की जरूरत पड़ेगी।

इनका कहना है

दो क्रेन से लिफ्ट कर हाथी को सुरक्षित बाहर निकाल कर हाथी बचाव व पुनर्वास केंद्र में रखा गया है। पशु चिकित्सकों से इलाज कराई जा रही है। वन अकिारियों-कर्मचारियों के साथ महावत उसकी देखभाल में लगे हुए हैं। हाथी को खाने के लिए गुड़, गन्ना सहित पसंद की दूसरी खाद्य सामग्री दी जा रही है। वन्य जीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों के सलाह के अनुरूप सारी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है।

केके बिसेन सीसीएफ, सरगुजा

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