करंट से हुई थी हथिनी की मौत, गांव वालों ने किया दशगात्रUpdated: Mon, 19 Dec 2016 04:02 AM (IST)

हथिनी की मौत के बाद शोक संतप्त ग्रामीणों ने रविवार को पांच गांव के ग्रामीणों की मौजूदगी में दशगात्र कार्यक्रम संपन्न कर दिया।

बतौली, नईदुनिया न्यूज। बतौली के मानपुर में बीते सात दिसंबर को करंट लगने से मादा हथिनी की मौत के बाद शोक संतप्त ग्रामीणों ने रविवार को पांच गांव के ग्रामीणों की मौजूदगी में दशगात्र कार्यक्रम संपन्न कर दिया। मानपुर पंचायत ने ब्रह्मभोज का आयोजन किया था, जिसमें सैकड़ों लोगों के साथ वन विभाग की पूरी टीम शामिल थी। मृत हथिनी के आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ दो मिनट मौन भी रखा गया था।

बतौली के दर्जन भर से ज्यादा गांव हाथी प्रभावित रहे हैं। हाथियों ने ग्रामीणों की लाखों की उपज भी पिछले वर्षों में चौपट की है। जानमाल के नुकसान का भय वर्ष भर बना रहता है। पिछले सात दिसंबर को भी 27 हाथियों का दल घोघरा होते हुए मानपुर पहुंचा था। सात दिसंबर की सुबह हाथी गन्ना के खेतों की ओर बढ़ ही रहे थे कि एक मादा हथिनी एक खेत में ट्यूबवेल चलाने के लिए खींचे गए तार की चपेट में आ गई और करंट लगने से तत्काल उसकी मौत हो गई।

वन विभाग के आला अधिकारी हथिनी के मृत होने की खबर पर घटना स्थल पहुंचे थे। पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों के सहयोग से शव को दफना भी दिया गया था। बाद में दो-तीन दिनों तक गुस्साए हाथी अन्य किसानों की फसलें नष्ट करते रहे और लगभग 30 एकड़ से ज्यादा फसल नष्ट हुई थी। मानपुर के ग्रामीणों ने बताया कि हाथी गुस्से के साथ शोक में थे। वे दफन किए स्थल की मिट्टी हटाते हुए रात में बिलखते रहे।

शोकग्रस्त हाथी आंसू भी गिराते रहे। ग्रामीणों ने हाथी समूह का बिलखना पहली बार देखा था। तीन दिन पहले मानपुर पंचायत में ग्रामीणों की बैठक हुई थी,जिसमें मृत हथिनी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ हिन्दू पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार दशगात्र व ब्रह्मभोज कार्यक्रम आयोजन का प्रस्ताव पारित किया गया था।

रविवार को तय कार्यक्रम के अनुसार मानपुर सहित शिवपुर, घोषरा, टेड़गा और खाराकोना के सैकड़ों ग्रामीण दशगात्र कार्यक्रम के लिए एकत्र हुए। गांव के बैगा द्वारा पूजा पाठ के कराए जाने के बाद ग्रामीणों ने ब्रह्मभोज का भी आयोजन किया। दो मिनट मौन के साथ समस्त ग्रामीणों ने मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। भावुक ग्रामीणों का विश्वास है कि मृत हथिनी की दिवंगत आत्मा का हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार करना आवश्यक है तभी उसकी आत्मा को शांति मिलेगी और अन्य हाथी संतोष का अनुभव करेंगे।

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