पिता-पुत्र खेत में कर रहे थे निगरानी, हाथी ने खाट सहित उठाकर पटक दियाUpdated: Tue, 31 Oct 2017 01:24 AM (IST)

हाथी ने मूंगफली के खेत की निगरानी में खाट लगाकर सो रहे पिता-पुत्र को सूंड से उठाकर फेंक दिया।

अंबिकापुर । सूरजपुर वन परिक्षेत्र के सोनगरा क्षेत्र में स्वच्छंद विचरण कर रहे इकलौते हाथी ने मूंगफली के खेत की निगरानी में खाट लगाकर सो रहे पिता-पुत्र को सूंड से उठाकर फेंक दिया। एकाएक हुए हमले के बावजूद ग्रामीण तेजी से बस्ती की ओर भागा और हाथी के हमले की सूचना गांव वालों को दी।

रात में ही जब ग्रामीणों के साथ वन अमला मौके पर पहुंचा तो हाथी वहां से जा चुका था। 12 वर्षीय बालक खाट के नीचे पड़ा हुआ था। उसे हल्की चोट आई थी। इलाज के बाद बालक को घर पहुंचा दिया गया है।

घटना सूरजपुर वन परिक्षेत्र के डुमरिया बीट के ग्राम बुंदिया मानापारा की है। सूरजपुर उप वनमंडलाधिकारी ने बताया कि बुंदिया के मानापारा बस्ती में परदेशी कंवर द्वारा घर से लगभग 200 मीटर दूर मूंगफली की खेती की गई है। मूंगफली की खुदाई कर उपज को खेत में ही रखा गया है। मूंगफली की सुरक्षा के लिए परदेशी कंवर, पुत्र शिशुपाल कंवर 12 वर्ष के साथ पेड़ के नीचे खाट लगाकर खेत के नजदीक सो रहा था।

बीती रात लगभग साढ़े 10 बजे लोनर हाथी सोनगरा जंगल की ओर से बुंदिया बस्ती में उसी स्थान पर पहुंच गया जहां परदेशी कंवर, पुत्र के साथ एक ही खाट में सो रहा था। हाथी के आने की भनक दोनों को नहीं लगी। हाथी ने खाट सहित पिता-पुत्र को उठाकर फेंक दिया। परदेशी खाट से दूर जा गिरा और उसका पुत्र खाट के नीचे ही दबा रहा।

एकाएक हाथी के आ जाने से भयभीत परदेशी उठकर बस्ती की ओर भागा और हल्ला करने लगा कि हाथी ने उसके पुत्र को मार दिया है। जानकारी मिलते ही वन अमले के साथ ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो शिशुपाल कंवर खाट के नीचे पड़ा हुआ था। आसपास हाथी की मौजूदगी भी नहीं थी। बालक को हल्की चोट आई थी। रात में ही उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक को घर रवाना कर दिया गया।

सूरजपुर रेंजर द्वारा तत्कालीक सहायता के रूप में एक हजार रुपए प्रदान की गई है। जिस हाथी ने पिता-पुत्र को खाट सहित उठाकर फेंक दिया था, वह पिछले कई माह से अकेले ही घूम रहा है। उसके द्वारा जनहानि की घटना भी कारित की जा चुकी है। सोमवार को लोनर हाथी सोनगरा जंगल में ही डटा रहा है। जंगल से लगे गांवों में ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। उन्हें जंगल न जाने की समझाइश दी गई है।

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