कुएं में गिरी हाथी को बचाने 24 घंटे से ऑपरेशन Updated: Tue, 14 Nov 2017 11:18 AM (IST)

0 रविवार रात लगभग 8 बजे नवाधक्की के कुएं में गिरी मादा हाथी 0 दल में शामिल शेष 12 हाथी लगे चिंघाड़ने तो पता चला घटना का 0 दो जेसीबी से कुएं से हाथी को निकालने बनाया गया स्लोप 0 पीछे का पैर फ्रेक्चर होने से कराह रही दर्द से, कुएं से निकालना चुनौती अंबिकापुर/प्रतापपुर । नईदुनिया प्रतिनिधि सूरजपुर वनमंडल के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग

0 रविवार रात लगभग 8 बजे नवाधक्की के कुएं में गिरी मादा हाथी

0 दल में शामिल शेष 12 हाथी लगे चिंघाड़ने तो पता चला घटना का

0 दो जेसीबी से कुएं से हाथी को निकालने बनाया गया स्लोप

0 पीछे का पैर फ्रेक्चर होने से कराह रही दर्द से, कुएं से निकालना चुनौती

अंबिकापुर/प्रतापपुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

सूरजपुर वनमंडल के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवाधक्की में रविवार रात लगभग 20 फीट गहरे कुएं में मादा हाथी गिर गई। पिछले लगभग 24 घंटे से मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने वन विभाग रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। दो जेसीबी की मदद से कुएं के पास स्लोप बनाने के बावजूद मादा हाथी उससे बाहर निकलने की स्थिति में नहीं है। उसके पिछले पैरों में गंभीर चोट आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में वन विभाग के्रन का सहारा लेकर मादा हाथी को बाहर निकालने के प्रयास में जुटा है। जरूरी हुआ तो उसे बेहोश कर क्राल में रख उपचार सुविधा भी प्रदान किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों के अलग-अलग दल विचरण कर रहे हैं। मोहनपुर जंगल में 19 हाथी जमे हैं, वहीं 13 हाथियों का दल बनारस मुख्यमार्ग में घाट पेंडारी से लगे नवाधक्की गांव के आसपास घूम रहा है। रविवार रात लगभग आठ बजे 13 हाथियों का दल नवाधक्की गांव पहुंचा। गांव के समीप स्कूल के पास पहुंचते ही दल में शामिल मादा हाथी लगभग 20 फीट गहरे कुएं में गिर गई। उसके कुएं में गिरते ही दल के दूसरे हाथियों ने कुएं को चारों ओर से घेर लिया। कुएं में गिरे हाथी को निकाल न पाने के गम में उपर खड़े हाथी चिंघाड़ने लगे। उनकी चिंघाड़ सुनकर नवाधक्की व उससे लगे गांवों के लोग भयभीत हो उठे। तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। रात लगभग नौ बजे ही वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों को सतर्क कर सुरक्षित तरीके से वन अधिकारी-कर्मचारियों ने कुएं के पास जमे हाथियों को दूर भगाया व उसके बाद कुएं में गिरे मादा हाथी की प्राणरक्षा के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। चूंकि रात में विभाग के पास कोई संसाधन उपलब्ध नहीं था, इसलिए अगली सुबह कुएं से मादा हाथी को निकालने की योजना बनाई और सारी रात निगरानी में लगे रहे ताकि दल के दूसरे सदस्य आसपास के गांवों में जानमाल को नुकसान न पहुंचा सके। नवाधक्की व उससे लगे इलाकों में मुनादी कराकर गांव वालों को अलर्ट कर दिया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन में दो जेसीबी

सोमवार सुबह एसडीओ प्रभाकर खलखो, बीएस भगत, यूपी पैकरा, प्रतापपुर रेंजर बीएम जायसवाल के नेतृत्व में वन विभाग ने मादा हाथी को सुरक्षित निकालने का प्रयास शुरू किया। दो जेसीबी मौके पर लगाया गया। अधिकारियों की माने तो कुएं में पानी कम था। कुएं में गिरते वक्त हाथी के पीछे का हिस्सा नीचे गिरा था। आधा शरीर कुएं के दलदल में फंस गया। बड़ी मुश्किल से मादा हाथी के शरीर को दलदल से निकाला गया। दोनों जेसीबी के सहारे कुएं पर दो ओर से ऐसा स्लोप तैयार किया गया, जिससे मादा हाथी आसानी से निकल जाए।

पैर फ्रेक्चर इसलिए पड़ी रही कुएं में

भीड़ को नियंत्रित कर वन अमले ने मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने जेसीबी से गड्ढा करा स्लोप तैयार किया। बावजूद मादा हाथी बाहर निकलने की कोशिश करना तो दूर उठ भी नहीं सकी। नजदीक के जंगल में हाथियों की मौजूदगी से खतरा बरकरार था। बावजूद वन अधिकारी-कर्मचारियों ने सतर्कता के साथ रेस्क्यू जारी रखा। उम्मीद की जा रही थी कि कुछ देर बाद हाथिनी खुद उठकर गड्ढों के सहारे बाहर निकल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वन अधिकारियों ने स्थिति को देख बताया है कि छह फीट ऊंची मादा हाथी के पेल्विक बोन में चोट है। पीछे का एक पैर संभवतः फ्रेक्चर हो चुका है, इसलिए वह उठकर स्लोप के सहारे कुएं से बाहर निकल पाने की स्थिति में नहीं है।

क्रेन व पट्टे का उपयोग करने पर विचार

कुएं में गिरी मादा हाथी को लगी चोट और बाहर निकलने पूरी व्यवस्था बनाने के बावजूद उसके सुरक्षित तरीके से स्वयं बाहर नहीं निकलने की स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने एसईसीएल की मदद लेने की योजना बनाई है। एसईसीएल से क्रेन की व्यवस्था कराई गई। अधिकारियों ने बताया कि मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने क्रेन व पट्टे का उपयोग किया जाएगा। इसमें सावधानी बरतना जरूरी है। आटा चक्की में उपयोग किए जाने वाले पट्टे के समान चौड़े-मजबूत पट्टे को हाथी में लपेट क्रेन के सहारे बाहर निकालने पर विचार चल रहा है। इसमें खतरा अधिक है। हाथी का वजन काफी अधिक है। थोड़ी सी असावधानी होने पर स्थिति बिगड़ सकती है।

रात में रेस्क्यू ऑपरेशन में खतरा

सोमवार सुबह से मादा हाथी को निकालने का प्रयास चलता रहा, लेकिन शाम ढलते तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी थी। जिस स्थान पर वह कुएं में गिरी है, उसके नजदीक के जंगल में दल के शेष सदस्य जमे हैं। अंधेरा होने के बाद हाथियों के पुनः कुएं के नजदीक आने की संभावना को देखते हुए विभाग पूरी तरह अलर्ट है। रात में रेस्क्यू को खतरा बताते हुए आसपास के लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर चले जाने समझाइश दी गई है। विशषज्ञों का कहना है कि यदि इंसानी रेस्क्यू ऑपरेशन में कुएं में गिरे हाथी को बाहर निकालने सफलता नहीं मिली, तो संभव है कि अंधेरा होने के बाद हाथी जब मौके पर पहुंचेंगे तो खुद की कोशिश से कुएं में गिरी हाथी को निकालने में सफल हो जाएंगे। क्योंकि ऑपरेशन में वन विभाग ने कुएं से बाहर निकालने का रास्ता बना दिया है। दल के दूसरे सदस्यों द्वारा हाथी को बाहर निकालने के बावजूद पैरों में चोट से उसका आगे बढ़ना संभव नहीं है।

विशेषज्ञों की सलाह ले रहा विभाग

कुएं में गिरे मादा हाथी घटना के बाद से लगातार कराह रही है। मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने चल रहे अभियान को लेकर राजधानी रायपुर में बैठे आलाधिकारी पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। सीसीएफ केके बिसेन ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक व मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक डा.आरके सिंह, वन्य प्राणी विशेषज्ञ डा. अजय देसाई, डा. सुब्रतो राय चौधरी आदि से मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने मार्गदर्शन लिया जा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप डीएफओ बीपी सिंह के नेतृत्व में सूरजपुर वनमंडल की टीम प्रबंधन में जुटी है। ताकि मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिल जाए।

तो क्राल में रखकर करेंगे उपचार

सीसीएफ केके बिसेन ने बताया कि मादा हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने के साथ ही उसके पेल्विक बोन पिछले पैर में हुए फ्रेक्चर को देखते हुए डा. चंदन, डा. जड़िया जैसे वरिष्ठ पशु चिकित्सकों से संपर्क किया जा चुका है। दोनों विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा आवश्यकता पड़ने पर मादा हाथी को बेहोश कर उपयुक्त क्राल में रखा जाएगा। जहां उसे उपचार सुविधा प्रदान की जाएगी। क्राल, लकड़ी का पिंजरा होता है, जिसमें हाथियों को रखा जाता है। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि रेस्क्यू वाले स्थल पर न जाएं। अनावश्यक भीड़ से ऑपरेशन में खलल पड़ सकती है। नजदीक के जंगल में हाथियों के जमे रहने से सतर्कता जरूरी है।

ढेलसरा में भी गिरे थे चार हाथी

लगभग पखवाड़े भर पहले सरगुजा जिले के सीतापुर वन परिक्षेत्र के ग्राम ढेलसरा में भी तीन शावक सहित चार हाथी ढोढ़ीनुमा कुएं में गिर गए थे। वन विभाग ने मशक्कत के बाद ऑपरेशन गजानन चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पा ली थी। सूरजपुर के नवाधक्की में कुएं में गिरे हाथी को बाहर निकालने उसी तर्ज पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। यदि हाथी के पिछले पैरों में चोट नहीं आई होती तो यह भी आसानी से बाहर निकल जाती।

नई रणनीति के साथ मंगलवार सुबह चलेगा रेस्क्यू आपरेशन

लगभग 24 घंटे तक रेस्क्यू आपरेशन चलाने के बावजूद कुएं में गिरे मादा हाथी को निकालने में सफलता नहीं मिलने पर सोमवार रात लगभग आठ बजे रेस्क्यू आपरेशन बंद कर दिया गया। नजदीक के जंगल में दल के दूसरे हाथियों की मौजूदगी से खतरे को देखते हुए आपरेशन बंद करना पड़ा। रात के अंधेरे में दल के दूसरे सदस्य घटनास्थल पर पहुंच सकते हैं, इसलिए कुएं में गिरे हाथी की निगरानी में लगे वनकर्मियों को भी सतर्क रहने कहा गया है। सीसीएफ केके बिसेन ने बताया कि कुएं में गिरा हाथी चलने लायक नहीं रह गया है। उसे स्वस्थ्य होने में वक्त लगेगा। उन्होंने बताया कि क्रेन मिल चुकी है। हाथी को बाहर निकालने जिन पट्टों की आवश्यकता थी, वह भी प्राप्त हो गई है। पट्टे को बेहतर तरीके से हाथी पर लपेटा जाएगा। उसके बाद क्रेन के सहारे उसे बाहर निकाला जाएगा। घटनास्थल के नजदीक एलिफेंट प्रूफ ट्रेंच की खुदाई कराई जाएगी। उसी के भीतर घायल हाथी रहेगा। यहीं पर उसे उपचार सुविधा प्रदान की जाएगी। चूंकि हाथी खड़ा होने लायक नहीं है, इसलिए क्राल बनाकर उसे रखना उचित नहीं लग रहा है।

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