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GST: किस चीज पर लगेगा कितना टैक्स, क्या होगा सस्ता और क्या महंगाUpdated: Fri, 19 May 2017 02:59 PM (IST)

देश में जीएसटी लागू करने की तैयारी है और इससे जो सबसे ज्यादा आम आदमी प्रभावित होगा।

नई दिल्ली। श्रीनगर में जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक में शुक्रवार को दूसरे और अंतिम दिन सर्विस टैक्स की दरों पर सहमति बनाने की तैयारी है। सर्विस टैक्स पर फैसले के बाद यह काफी कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सी चीज कितनी सस्ती होगी और कितनी महंगी।

देश में 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने की तैयारी है और इससे जो सबसे ज्यादा आम आदमी प्रभावित होगा क्योंकि यही जीएसटी तय करेगा कि क्या महंगा होगा और क्या सस्ता।

इससे पहले गुरुवार को हुई बैठक में काउंसिल ने 1211 चीजों पर टैक्स निर्धारण पर सहमति जता दी है। इन सभी को 18 प्रतिशत तक के टैक्स के दायरे में रखा गया है और इसे भी अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है।

राजस्व सचिव हसमुख आधिया ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि 14 प्रतिशत चीजें 5 प्रतिशत टैक्स के दायरे में हैं वहीं 17 प्रतिशत चीजों को 12 प्रतिशत टैक्स जबकि 43 प्रतिशत चीजों को 18 प्रतिशत टैक्स के दायरे में रखा गया है। इसके अलावा 19 प्रतिशत चीजें 28 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आएंगी।

तो आइए हम आपको बताते हैं कि किस चीज पर लगेगा कितना टैक्स।

सुहाग के सिंदूर समेत इन सब पर नहीं लगेगा टैक्स

काउंसिल ने जो तय किया है उसके अनुसार डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे अंडों, दूध, दही, बटर मिल्क के अलावा ताजा मांस, मछली, प्रकृतिक शहद, ताजा फलों और सब्जियों, आटे, बेसन, ब्रेड, प्रसाद, नमक, बिंदी, सिंदूर, स्टांप, न्यायिक कागजात, छपी हुई किताबें, अखबार, चूड़ियां और हैंडलूम पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा।

सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स देकर खरीद सकेंगे यह सबकुछ

कई डेयरी और अन्य प्रोडक्ट्स जीरो टैक्स के दायरे में हैं लेकिन फिश फिलेट, मलाई निकला दूध का पावडर, ब्रांडेड पनीर, फ्रोजन सब्जियां, कॉफी, चाय, मसाले, पिज्जा का ब्रेड, रस्क, साबुदाना, केरोसीन, कोयला, दवाएं, स्टेंट और लाइफ बोट जैसी चीजें 5 प्रतिशत टैक्स के दायरे में रहेंगी।

घीं, चीज और ड्राय फ्रुट पर लगेगा 12 प्रतिशत टैक्स

घीं और ड्रॉय फ्रुट्स को स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है लेकिन यह आपकी जेब खाली कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार फ्रीज किए हुए मांस उत्पाद, पैकिंग में आने वाले बटर, चीज, घीं, ड्राय फ्रुट, एनिमल फैट सॉसेज, फ्रूट जूस, भूटिया, नमकीन, आयुर्वेदिक दवाएं, टूथ पावडर, अगरबत्ती, कलरिंग बुक्स, पिक्चर बुक्स, छाते, सिलाई मशीन और मोबाइल फोन 12 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आएंगे।

आईस्क्रीम को पिघलाएगा 18 प्रतिशत टैक्स

इस टैक्स स्लैब के अंतर्गत आईस्क्रीम, रिफाइंड शक्कर, पास्ता, कॉर्नफ्लैक्स, पैस्ट्री और केक, प्रीजर्व की हुई सब्जियां, मिनरल वाटर, जैम, सॉस, सूप, इंस्टेंट फूड मिक्स, टिशू, लिफाफे, नोट बुक, स्टील के बर्तन, प्रिंटेज सर्किट, स्पीकर्स और मॉनिटर्स के अलावा कैमरों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगने वाला है।

लत और लग्जरी पड़ेगी महंगी

इन सब चीजों के अलावा जो लोग लग्जरी का शौक रखते हैं और लत से मजबूर हैं उन्हें यह सब काफी महंगा पड़ सकता है। जीएसटी के तहत बबल गम, बिना कोकोआ वाली चॉकलेट, चॉकलेट वाली वेफर्स, पान मासाला, कलर पेंट, डियोड्रैंट, शेविंग क्रीम, आफ्टर शेव, डाई, सनस्क्रीन, वॉलपेपरस सिरामिक टाइल्स, वॉटर हीटर, डिश वॉशर, वजन तोलने की मशीन, वॉशिंग मशीन, एटीएम, वेंडिंग मशीन, वैक्यूक क्लीनर, शेवर, हेयर क्लीपर, ऑटोमोबाइल्स, बाइक्स, एसी, रेफ्रिजरेटर निजी उपयोग वाले एयरक्राफ्ट और याच जैसी चीजें 28 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आएंगी।

सस्ता:

कोयला हो जाएगा सस्ता: जीएसटी आने के बाद कोयला सस्ता हो जाएगा। काउंसिल ने कोयले पर जीएसटी की दर 5 फीसद तय की है। आपको बता दें कि यह दर मौजूदा समय में 11.7 फीसद है। कोयले के सस्ते होने से बिजली उत्पादन की लागत भी कम होगी।

चीनी, चाय और कॉफी होगी सस्ती: राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बताया कि चीनी, खाद्य तेल, नार्मल टी और कॉफी पर जीएसटी के अंतर्गत 5 फीसद की दर से टैक्स लगेगा, मौजूदा समय में यह दर 4 से 6 फीसद है।

हेयर ऑयल और साबुन भी होगा सस्ता: जीएसटी काउंसिल की ओर से तय की गईं दरों के मुताबिक जीएसटी के अंतर्गत 18 फीसद की दर से टैक्स लगेगा। यह मौजूदा दर से काफी कम है। वर्तमान में इन उत्पादों पर 28 फीसद की दर से टैक्स लगता है।

अनाज होंगे सस्ते: जीएसटी काउंसिल ने अनाजों को जीएसटी के दायरे से रखा है, यानी इन पर कोई कर नहीं लगेगा। इसी तरह गेहूं, चावल सहित अनाज व दूध-दही जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से छूट दी गई है।

क्या होगा महंगा:

जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार की बैठक में सर्विस सेक्टर पर टैक्स की दर का निर्धारण किया जाना है। अगर काउंसिल सर्विस के 12 फीसद के टैक्स स्लैब में रखती है तो यह एक राहत भरी खबर होगी, लेकिन अगर सर्विस को 18 फीसद के स्लैब में रखने का फैसला किया जाता है तो यकीनन महंगाई बढ़ेगा। ऐसा होने से आम आदमी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, होटल में खाना, मोबाइल फोन पर बातचीत जैसी अन्य सेवाएं महंगी हो जाएंगी।

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