आने वाले समय में गायब हो जाएंगे एटीएम, इनकी जगह ले रही है यह टेक्नोलॉजीUpdated: Wed, 16 Aug 2017 09:26 AM (IST)

कभी बैंकिंग उद्योग का महत्वपूर्ण घटक माने जाने वाले एटीएम अब मार्जिन नहीं होने से बंद हो रहे हैं।

मुंबई। कभी उदारीकरण का चेहरा रहे एटीएम की संख्या लगातार कम होती जा रही है। बीते पांच सालों में जहां एटीएम लगाने की संख्या तेजी से बढ़ रही थी, वहीं बीते छह महीने में इसमें कोई वृद्धि नहीं देखी जा रही है। बताते चलें कि जहां साल 2012-13 में देश में 1.1 लाख एटीएम थे, वहीं साल 2016-17 में इनकी संख्या 2.2 लाख तक पहुंच गई थी।

हिताची पेमेंट सर्विस भारत में मनी स्पॉट के नाम से ऑपरेट करती है और देश में कैश निकालने के काम आती है। कई सालों से इस सर्विस में रहने के बावजूद पिछले एक साल में इसके आधे से अधिक यानी करीब 700 मनी स्पॉट आउटलेट्स बंद हो गए हैं। ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) का बिजनेस संकट में है। कभी बैंकिंग उद्योग का महत्वपूर्ण घटक माने जाने वाले एटीएम अब मार्जिन नहीं होने से बंद हो रहे हैं।

एचडीएफसी बैंक के चीफ एक्जिक्यूटिव आदित्य पुरी के अनुसार जैसे-जैसे हम डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ते हैं, हम एटीएम से होने वाले लेन-देन में कमी देखते हैं। शुरुआती दिनों में एटीएम के जरिये एचडीएफसी बैंक ग्राहकों को अधिक संख्या में खुद से जोड़कर सबसे मूल्यवान बैंक बन गया था।

एटीएम की संख्या साल 2012 में करीब एक लाख थी, जो साल 2015 तक दोगुनी होकर करीब 2 लाख तक पहुंच गई। मगर, पिछले छह महीनों में इसमें कोई वृद्धि नहीं देखी गई है। एटीएम से डेबिट कार्ड लेन-देन की संख्या 75 करोड़ प्रतिमाह से गिरकर 66 करोड़ लेनदेन प्रतिमाह तक पहुंच गई है।

एटीएम लगाने वाले आठ वाइट लेबल ऑपरेटर्स (गैर-बैंकिंग संस्थान) में से महज तीन ही उचित संख्या में मशीनों को स्थापित किया है, जो करीब 10,000 के आस-पास हैं। उन में सक्रिय कई एटीएम घाटे का सौदा बन रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती पेमेंट्स और स्मार्टफोन्स के टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट्स की वजह से मिल रही है।

इसके अलावा रेगुलेटरी इश्यू भी एटीएम के लिए घातक साबित हो रहे हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद से ज्यादातर यूजर्स डिजिटल ट्रांजेक्शन्स कर रहे हैं। ऐक्सिस बैंक के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव आनंद ने बताया कि मोबाइल फोन पर होने वाला लेन-देन, अब एटीएम से होने वाले लेन-देने से अधिक हो गया है।

बताते चलें कि पहला एटीएम बर्कले बैंक्स ने 1967 में लंदन में स्थापित किया था। एटीएम को पहली बार भारत में एचएसबीसी बैंक 1987 में लेकर आया और सिटी बैंक ने शुरुआत में सबसे ज्यादा एटीएम भारत में स्थापित किए। बाद में एचडीएफसी, एक्सिस और आईसीआईसीआई बैंक ने भारत में एटीएम स्थापित किए।

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