वोडाफोन व आइडिया के विलय से बनी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनीUpdated: Mon, 20 Mar 2017 09:39 PM (IST)

मोबाइल सेवा क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों वोडाफोन और आइडिया ने विलय की घोषणा कर दी है।

नई दिल्ली। मोबाइल सेवा क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों वोडाफोन और आइडिया ने विलय की घोषणा कर दी है। समूचे दूरसंचार बाजार के साथ ही एक अरब से ज्यादा मोबाइल सेवा के ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा।

टेलीकॉम बाजार में रिलायंस जियो के आने से शुरू हुआ प्राइस वॉर का लाभ ग्राहकों को मिला। अब वोडाफोन और आइडिया के एक होने से इनके मजबूत नेटवर्क का फायदा बेहतर फोन सेवाओं के तौर पर मिलने की उम्मीद है।

ब्रिटेन की कंपनी वोडाफोन की भारतीय सब्सिडियरी और बिड़ला समूह की कंपनी आइडिया के विलय के बाद यह पूंजी व ग्राहक संख्या आधार पर देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन जाएगी। आदित्य बिड़ला समूह के प्रमोटर कुमार मंगलम बिड़ला नई कंपनी के चेयरमैन होंगे।

इस विलय की खबर आते ही आइडिया सेलुलर का शेयर एक समय करीब 15 फीसद तक का गोता लगा गया। हालांकि, एनएसई पर बाद में यह 9.62 फीसद की गिरावट के साथ 97.70 रुपये पर बंद हुआ।

वोडाफोन व आइडिया की तरफ से जारी बयान से साफ है कि पूरी विलय प्रक्रिया बेहद जटिल होने वाली है। शायद इसीलिए दोनों कंपनियों ने इसके दो वर्षों में पूरा होने की बात कही है। विलय के बाद बनने वाली कंपनी में वोडाफोन के पास फिलहाल 45.1 प्रतिशत और आइडिया के पास 26 फीसद हिस्सेदारी होगी।

आइडिया की हिस्सेदारी आगे बढ़ाई जाएगी। अगर यह हिस्सेदारी चार वर्षों में नहीं बढ़ पाती है, तो फिर वोडाफोन की इक्विटी घटाई जाएगी। दोनों कंपनियों के हिस्से को समान स्तर पर लाया जाएगा। अगर वोडाफोन के पास ज्यादा हिस्सा होगा तो भी दोनों पक्षों का वोटिंग अधिकार बराबर होगा।

ग्राहकों पर पड़ेगा असर

दो बड़ी कंपनियों के एक हो जाने से प्रतिस्पर्द्धा घटेगी। हाल के दिनों में इन कंपनियों के बीच डाटा कीमतों को घटाने के लेकर होड़ मची है। इसमें स्थिरता आने के आसार हैं। हां, इन दोनों कंपनियों के मौजूदा ग्राहकों को एक दूसरे के बेहद बड़े नेटवर्क का फायदा जरूर मिलेगा। बड़ी कंपनी व नेटवर्क होने की वजह से ये अपने ग्राहकों को ज्यादा आकर्षक स्कीमों के साथ बनाए रख सकती हैं।

एयरटेल के लिए तगड़ी चुनौती

विलय से सबसे बड़ा असर एयरटेल पर पड़ेगा जो अभी 23.5 फीसद हिस्सेदारी के साथ देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। वोडाफोन के पास 20.5 करोड़ ग्राहक हैं। देश के मोबाइल सेवा बाजार में उसकी हिस्सेदारी 18.16 फीसद है। आइडिया के 19.05 करोड़ ग्राहक हैं। उसकी बाजार हिस्सेदारी 17 फीसद के करीब है। साफ है कि नई कंपनी की हिस्सेदारी एयरटेल से काफी ज्यादा होगी।

सलाहकार फर्म सीएलएसए का कहना है कि विलय बाद संयुक्त कंपनी का पूंजी आकार 80 हजार करोड़ रुपये हो जाएगा। सक्रिय ग्राहकों के आधार पर बाजार हिस्सेदारी 40 फीसद होगी। इसके पास देश में आवंटित स्पेक्ट्रम का एक चौथाई हिस्सा होगा। ये सारे आंकड़े बताते हैं कि देश की दिग्गज मोबाइल ऑपरेटर एयरटेल के लिए हालात चुनौतीपूर्ण होंगे।

एक तरफ से रिलायंस जियो की वजह से पहले की मोबाइल ऑपरेटरों के सामने अनिश्चित माहौल बना हुआ है। विलय बाद गठित नई कंपनी जियो की चुनौतियों का ज्यादा मजबूती से सामना कर सकेगी। जियो की फ्री सेवा के बाद एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया समेत सभी मोबाइल ऑपरेटरों को अपनी सेवा शुल्कों में भारी कटौती करनी पड़ी है।

इससे इनकी कमाई और मुनाफे पर असर पड़ रहा है। वोडाफोन की पकड़ मेट्रो व बड़े शहरों में अच्छी है। आइडिया ने छोटे शहरों मे ग्राहकों का बड़ा आधार तैयार किया है। एयरटेल को इनकी संयुक्त ताकत से मुकाबला करना होगा। कई जानकार इस विलय को भारतीय बाजार में वोडाफोन की घट रही रुचि के तौर पर भी देख रहे हैं। भारी कर्ज में डूबी इस ब्रिटिश कंपनी के हालात ठीक नहीं हैं।

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