एनपीए में कमी के नए हथियार का इंतजारUpdated: Fri, 02 Jan 2015 11:03 PM (IST)

उच्चस्तरीय बैठक ज्ञान संगम में फंसे कर्ज (एनपीए) को लेकर आगे क्या रणनीति बनाई जाती है, इस पर सभी की नजर है।

नई दिल्ली। पुणे में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार पर चल रही उच्चस्तरीय बैठक ज्ञान संगम में फंसे कर्ज (एनपीए) को लेकर आगे क्या रणनीति बनाई जाती है, इस पर सभी की नजर है।

एनपीए (गैर निष्पादक परिसंपत्तियां) वसूलने के अभी तक सारे शस्त्रों के नाकाम होने के बाद सरकारी बैंकों की नजर उन हथियारों पर है जो उन्हें फंसे कर्ज से लड़ने के लिए इस बैठक के बाद मिलेंगे। शुक्रवार से शुरू हुई इस बैठक में बैंकों की तरफ से ऋण वसूली प्राधिकरण (डीआरटी) के जरिये एनपीए वसूली को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का भी विरोध करने का फैसला किया है।

बैंकों के सूत्रों ने बताया कि उनकी तरफ से इस बैठक में एनपीए वसूली के मौजूदा तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलने का सुझाव दिया जाएगा। सरकार को यह स्पष्ट तौर पर बताया जाएगा कि हाल ही में उसकी तरफ से डीआरटी की संख्या बढ़ाने के फैसले से एनपीए वसूली पर खास फर्क नहीं पड़ने वाला है।

पिछले दो दशकों में डीआरटी कर्ज वसूली के काम में न सिर्फ पूरी तरह से असफल हो चुके हैं, बल्कि इसकी वजह से वर्ष 2002 में बनाए गए प्रतिभूति कानून (एसएआरएफईएसआइ) की राह में भी अड़चन आ रही है।

कई कंपनियां तो डीआरटी की आड़ में प्रतिभूति कानून के प्रावधानों से बचने की कोशिश करती हैं। डीआरटी में ज्यादा वक्त लगता है। इसमें मामला जाने से कर्ज नहीं चुकाने वाले ग्राहकों की संपत्तियां जब्त होने से बच जाती हैं।

हाल ही में केंद्र सरकार ने छह नए डीआरटी बनाने का फैसला किया है। पहले से ही देश में 33 डीआरटी और 5 ऋण वसूली अपीलीय प्राधिकरण काम कर रहे हैं। इनका प्रदर्शन काफी असंतोषजनक रहा है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान इन डीआरटी में फंसे कर्जे से संबंधित जितने मामले गए उनसे सिर्फ 9.5 फीसद राशि ही वसूलने में सफलता मिली।

इसके पिछले वित्त वर्ष में 14 फीसद राशि वसूली जा सकी थी। इसके साथ ही प्रतिभूति कानून का भी कोई खास असर नहीं दिखाई दे रहा है। वर्ष 2013-14 के दौरान 946 करोड़ रुपये के फंसे कर्जे की राशि वसूलने की कोशिश प्रतिभूति कानून के तहत की गई थी।

इसकी महज 25.8 फीसद राशि ही बैंकों को मिल पाई थी। लोक अदालत के जरिये एनपीए वसूलने का तरीका तो और भी असफल साबित हो रहा है। गत वर्ष इन अदालतों से महज 6.2 फीसद एनपीए की राशि ही वसूली हो पाई थी।

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