RBI के मौद्रिक नीति समिति की बैठक जारी, नीतिगत दरों पर होगा फैसलाUpdated: Tue, 05 Dec 2017 11:32 PM (IST)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) वर्ष 2017 की आखिरी दो दिवसीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति समिति की बैठक कर रहा है।

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) वर्ष 2017 की आखिरी दो दिवसीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति समिति की बैठक कर रहा है। दो दिन (5 और 6 दिसंबर) चलने वाली इस बैठक का फैसला 6 दिसंबर को सामने आएगा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार की पॉलिसी बैठक में नीतिगत दरों को पूर्व दर (6 फीसद) पर ही बरकरार रख सकता है।

शेयर बाजार और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स कल की बैठक में तय होने वाली ब्याज दरों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इससे पिछली बैठक में जो अक्टूबर में हुई थी, में एमपीसी ने बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख ब्याज दरें बरकरार रखी थीं। साथ ही उसने चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान को घटाकर 6.7 फीसद कर दिया था।

वहीं रिवर्ज बैंक ने अगस्त महीने में प्रमुख उधार दरों में चौथाई फीसद की कटौती कर उसे 6 फीसद कर दिया था। यह छह वर्षों का निम्नतम स्तर था। बैंकर्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक लगातार दूसरी बार रेपो रेट या छोटी अवधि की उधार दरें अपरिवर्तित रख सकता है।

हाल ही में रेटिंग एजेंसी ने भी अनुमान लगाया है आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों को वर्तमान दर पर ही बरकरार रख सकता है। मौजूदा समय में रेपो रेट 6 फीसद है। वहीं, खुदरा महंगाई (मुद्रास्फीति) या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर अक्टूबर में सात महीने के उच्चतम स्तर के साथ 3.58 फीसद पर पहुंच गई थी, जो कि सितंबर महीने में 3.28 फीसद रही थी।

रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है कि हालांकि अक्टूबर के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में 4.2-4.6% की सीमा से कम है जिसके बारे में एमपीसी ने अपनी पिछली बैठक में पूर्वानुमान लगाया था। वहीं वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में हालिया संशोधन कीमतों पर दबाव बनाएगा जो कि मुद्रास्फीति के जोखिमों को बरकरार रख सकता है।

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