नोटबंदी के बाद 25 फीसद बढ़ी आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्याUpdated: Mon, 07 Aug 2017 08:13 PM (IST)

सरकार की तरफ से जारी आंकड़े बताते हैं कि इस साल आयकर रिटर्न भरने वालों की तादाद में 25 फीसद का इजाफा हुआ है।

नई दिल्ली। नोटबंदी से आर्थिक मोर्चे पर कोई और फायदा हुआ हो या न हुआ हो, लेकिन टैक्स देने वालों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़े बताते हैं कि इस साल आयकर रिटर्न भरने वालों की तादाद में 25 फीसद का इजाफा हुआ है। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में अमूमन 10 फीसद ती वृद्धि हुई थी।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की तरफ से जारी आंकड़े बताते हैं कि इस साल पांच अगस्त को समाप्त अवधि तक कुल 2,82,92,855 लोगों ने आयकर रिटर्न फाइल किया है। इसके पिछले वर्ष रिटर्न भरने वालों की कुल संख्या 2,26,97,843 थी।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस बात के साफ सबूत हैं कि नोटबंदी कर रिटर्न भरने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की वजह बनी है। इससे व्यक्तिगत स्तर पर आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने वालों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 25.3 फीसद बढ़कर 2,79,39,043 हो गई है जबकि कॉरपोरेट जगत की तरफ से आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी पिछले वर्ष के स्तर पर ही है।

नोटबंदी लागू होने के समय से सरकार यह दावा कर रही है कि इससे देश में कर दायरे को बढ़ाने में मदद मिलेगी। एक निश्चित सीमा के बाद बैंक खाते में पुराने नोट जमा कराने वालों के लिए आयकर रिटर्न जमा कराने की अनिवार्यता ने असर दिखाया है।

सरकार का यह भी कहना है कि करदाताओं की संख्या में वृद्धि से आयकर संग्रह में भारी बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष व्यक्तिगत स्तर पर प्राप्त कर संग्रह की राशि में 41.79 फीसद का इजाफा हुआ है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है ये आंकड़े बताते हैं कि काले धन के खिलाफ सरकार की लड़ाई सही दिशा में चल रही है। इसके चलते ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को कर दायरे में लाया जा रहा है।

इससे देश की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। आयकर विभाग की नीति नियामक संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी ने टैक्स दायरा बढ़ाने के साथ ही कर चोरी का खात्मा करने की प्रतिबद्धता जताई है।

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