मौद्रिक नीति समिति : ब्याज दरों पर सरकार व RBI में ठनीUpdated: Wed, 07 Jun 2017 08:33 PM (IST)

ब्याज दरों को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआइ) पूरी तरफ खुलकर आमने-सामने आ गए हैं।

नई दिल्ली। ब्याज दरों को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआइ) पूरी तरफ खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। वार्षिक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल ने बुधवार को वैधानिक रेपो रेट को स्थिर रख कर साफ कर दिया कि वह ब्याज दरों में कटौती का अपनी तरफ से समर्थन नहीं करेंगे।

यही नहीं, समीक्षा के बाद प्रेस कांफ्रेंस में पटेल ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को सरकार के नियंत्रण से पूरी तरह से आजाद बताते हुए यहां तक कह दिया कि समिति के सदस्यों ने वित्त मंत्रालय के लोगों से मिलने से भी इन्कार कर दिया। इसके बाद जो हुआ, वह सरकार व आरबीआइ के बीच बहुत कम बार हुआ है।

शाम को वित्त मंत्रालय में प्रमुख आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रह्माण्यम ने मीडिया के सामने नाराजगी भरा एक बयान दिया। अरविंद ने सबसे पहले महंगाई की दर के आकलन को लेकर आरबीआइ के मौजूदा तौर-तरीके पर ही सवाल उठाए।

उन्होंने अर्थव्यवस्था की दशा को लेकर केंद्रीय बैंक के तरीके को भी अंतिम मानने से इन्कार किया। आरबीआइ की तरफ से महंगाई की दर का लक्ष्य चार फीसद (दो फीसद ऊपर या नीचे) रखा गया है। सीईए ने कहा कि यह अभी काफी नीचे है। महंगाई दर में बड़ी वृद्धि के आसार नहीं है।

अर्थव्यवस्था में मांग की कमी है। आर्थिक विकास दर के बहुत ज्यादा बढ़ने के भी आसार नहीं है। इन तर्कों के आधार पर सुब्रह्माण्यम ने कहा, 'ऐसे में मौद्रिक नीति को नरम बनाने (ब्याज दरों में कटौती) का जैसा अभी माहौल है, वैसा कभी कभार ही होता है।'

मौद्रिक नीति पेश होने से दो दिन पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जताई थी। लेकिन एमपीसी में शामिल छह सदस्यों में से पांच ने वैधानिक दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का समर्थन किया है। इससे साफ है कि एमपीसी में सरकार की तरफ से नामित प्रतिनिधि भी दरों में कटौती के पक्ष में नहीं हैं।

आरबीआइ गवर्नर ने संवाददाता सम्मेलन में एमपीसी की स्वायत्ता को बहुत अहम बताया। कहा कि एमपीसी के दल ने समीक्षा से पहले वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने के आग्रह को ठुकराया है।

एमपीसी में आरबीआइ गवर्नर के अलावा दो डिप्टी गवर्नर तथा सरकार की तरफ से नामित तीन और प्रतिनिधि होते हैं। आरबीआइ और वित्त मंत्रालय के बीच पहले भी ब्याज दरों को लेकर तनाव का माहौल रहा है।

वर्ष 2012 में जब तत्कालीन आरबीआइ गवर्नर डी सुब्बाराव ने जब ब्याज दरों में कटौती की मांग खारिज कर दी थी, तब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुस्से में कहा था कि अगर अर्थव्यवस्था को संभालना उनका ही काम है तो यही सही, वह अकेले ही यह काम करेंगे।

लेकिन मौजूदा गर्वनर उर्जित पटेल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत विश्वस्त माना जाता है। खास तौर पर जिस तरह से पूर्व आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन की जगह पर पटेल को नियुक्त किया गया, उससे यह माना गया कि ब्याज दरों और अन्य आर्थिक मुद्दों पर केंद्र व रिजर्व बैंक के बीच अब ज्यादा बेहतर सामंजस्य रहेगा।

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