GST : व्यापारियों को सता रहा है 'रिवर्स चार्ज' की वापसी का डरUpdated: Thu, 26 Oct 2017 08:12 PM (IST)

जीएसटी की जटिलताओं से पार पाने में जुटे व्यापारियों को 'रिजर्व चार्ज' प्रणाली की वापसी का डर सता रहा है।

नई दिल्ली। जीएसटी की जटिलताओं से पार पाने में जुटे व्यापारियों को 'रिजर्व चार्ज' प्रणाली की वापसी का डर सता रहा है।

जीएसटी कानून का यह प्रावधान फिलहाल निलंबित है लेकिन व्यापारियों को लगता है कि अगर इसे स्थाई रूप से खत्म नहीं किया गया तो जीएसटी का अनुपालन सही मायनों में सरल नहीं बन सकेगा।

दरअसल सीजीएसटी कानून की धारा 9 की उपधारा चार और आइजीएसटी कानून की धारा 5 की उपधारा चार के तहत रिवर्स चार्ज प्रणाली का प्रावधान है।

इसका मतलब है कि अगर कोई पंजीकृत व्यापारी किसी गैर पंजीकृत कारोबारी से एक दिन में पांच हजार रुपये से अधिक का सामान या सेवा खरीदता है तो जीएसटी जमा करने की जिम्मेदारी पंजीकृत व्यापारी की होगी।

यह प्रावधान छोटे और बड़े दोनों तरह के व्यापारियों की परेशानी का कारण बन सकता है। छोटे व्यापारियों के लिए इसलिए कि अगर वे पंजीकृत नहीं हैं तो जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारी उनसे खरीद करना पसंद नहीं करेंगे।

वहीं बड़े व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण है कि अगर वे गैर-पंजीकृत व्यापारी से कोई वस्तु या सेवा प्राप्त करेंगे तो उस पर जीएसटी उन्हें खुद भरना होगा।

इससे उनकी लागत और बढ़ जाएगी। चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म एस. आर. डिनोडिया एंड कंपनी के पार्टनर संदीप डिनोडिया कहते हैं कि 'रिवर्स चार्ज' प्रणाली के प्रावधान के चलते सालाना 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वालों को जीएसटी से छूट का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है क्योंकि इस प्रावधान के चलते बड़े व्यवसायी उनसे माल या सेवा खरीदने से कतरा सकते हैं।

वहीं बड़े व्यवसायी अगर एक दिन में पांच हजार रुपये से अधिक की वस्तु या सेवा किसी गैर-पंजीकृत व्यापारी से प्राप्त करते हैं तो जीएसटी जमा करने की जिम्मेदारी उनकी होती है।

उन्हें अपने बही-खाते में इसे दर्ज करते हुए जीएसटी का भुगतान खुद ही करना होगा। यह बात अलग है कि बाद में उन्हें इसका इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल सकता है।

ऐसे में 'रिवर्स चार्ज' प्रणाली की प्रक्रिया से जीएसटी का अनुपालन जटिल होता है। एक जुलाई 2017 से देश में जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती महीनों में इस प्रावधान का सबसे प्रतिकूल असर छोटे व्यावसायियों पर पड़ रहा था।

इससे उन पर जीएसटी के अनुपालन का बोझ बढ़ रहा था। यही वजह है कि जीएसटी काउंसिल की छह अक्टूबर को हुई बैठक में रिवर्स चार्ज के नियम को 31 मार्च 2018 तक निलंबित रखने का फैसला करना पड़ा।

काउंसिल का कहना है इस विवादित प्रावधान पर विशेषज्ञों की एक समिति विचार करेगी। हालांकि व्यापारियों को डर है कि कहीं यह प्रावधान मार्च के बाद किसी रूप में वापस न आ जाए।

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