Digital भुगतान का घटा रुझान तो मुस्तैद हुए बैंकUpdated: Thu, 13 Jul 2017 08:39 PM (IST)

नोटबंदी के बाद देश भर में डिजिटल भुगतान में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसमें अब ब्रेक लगता दिख रहा है।

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद देश भर में डिजिटल भुगतान में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसमें अब ब्रेक लगता दिख रहा है। नवंबर, 2016 से मार्च, 2017 तक तमाम तरह के डिजिटल भुगतानों में काफी तेजी से वृद्धि हुई थी।

मार्च के बाद से इसमें गिरावट आने लगी है। शायद यही एक वजह है कि देश के दिग्गज बैंक एसबीआइ ने डिजिटल भुगतान से जुड़े तमाम शुल्कों में भारी कटौती करने का एलान किया है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) ने 15 जुलाई से एनईएफटी (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के जरिये होने वाले लेनदेन पर शुल्कों में 75 फीसद तक की कमी की है।

एसबीआइ इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी आइएमपी के जरिये 1,000 रुपये तक के फंड ट्रांसफर को भी शुल्क मुक्त कर चुका है। अब अन्य बैंकों की तरफ से भी डिजिटल लेनदेन पर शुल्कों में कटौती के संकेत हैं।

एसबीआइ ने एक हजार रुपये तक के डिजिटल लेनदेन को पूरी तरह से शुल्क मुक्त कर दिया गया है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय स्टेट बैंक की तरफ से की गई यह सबसे बड़ी पहल है, क्योंकि इससे ऑनलाइन छोटी खरीदारी करने का रास्ता खुल जाएगा।

एसबीआइ ने 10,000 रुपये से एक लाख रुपये तक के इंटरनेट व मोबाइल बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क को चार रुपये से घटाकर दो रुपये कर दिया है।

जबकि पांच लाख रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 40 रुपये के शुल्क को 10 रुपये कर दिया है। वैसे, शुल्क मुक्त लेनदेन को छोड़कर अन्य सभी भुगतानों पर 18 फीसद जीएसटी लगेगा।

एसबीआइ के एमडी (एनबीजी) रजनीश कुमार ने कहा कि यह कदम इंटरनेट व मोबाइल बैंकिंग को तेजी से बढ़ावा देगा।

अकेले भारतीय स्टेट बैंक के पास 3.27 करोड़ इंटरनेट बैंकिंग और करीब दो करोड़ मोबाइल बैंकिंग वाले ग्राहक हैं।

एसबीआइ की एक रिपोर्ट बताती है कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिये होने वाले भुगतान की राशि 70,000 करोड़ रुपये हो चुकी है। नोटबंदी लागू होने के बाद इसमें जितनी वृद्धि हुई है, उसे सामान्य रूप से हासिल करने में तीन साल लग जाते।

डिजिटल लेनदेन में दिख रही सुस्ती

एसबीआइ के इस दावे का एक दूसरा पहलू भी है जो रिजर्व बैंक की रिपोर्ट से सामने आता है। यह रिपोर्ट हर महीने जारी होती है।

इसका ताजा अंक बताता है कि नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट की तेज रफ्तार मार्च, 2017 तक बनी रही। इसके बाद से डिजिटल लेनदेन में सुस्ती आ रही है।

जून में वित्तीय लेनदेन के लिए 84.47 करोड़ बार डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल हुआ। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले 6.7 फीसद और मई की तुलना में 3.2 फीसद कम है।

मार्च में 89.3 करोड़ बार डिजिटल भुगतान सेवाओं का इस्तेमाल 1,49,589.1 अरब रुपये के लेनदेन के लिए हुआ था। मई में यह आंकड़ा घटकर 85.8 करोड़ बार का रहा। इस दौरान लेनदेन की राशि भी घटकर 1,11,109.3 अरब रुपये रह गई।

फिर से नकदी की तरफ लौटने लगे लोग सरकार ने जब आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी लागू की थी तो डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने को अहम वजह बताया गया था, ताकि अर्थव्यवस्था में ज्यादा पारदर्शिता आ सके।

चूंकि अब नकदी की समस्या काफी हद तक कम हो गई है और एटीएम में पैसे आसानी से मिल रहे हैं तो लोग फिर से नकदी की तरफ लौटने लगे हैं। ऐसे में एसबीआइ की तरफ से बुधवार को उठाया गया कदम खासा मायने रखता है।

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