जारी नहीं हो पाई RBI की सालाना रिपोर्ट, इतिहास में पहली बार हुआ ऐसाUpdated: Mon, 17 Jul 2017 09:45 PM (IST)

भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास में पहली बार हुआ है कि उसने निर्धारित तारीख पर पिछले वर्ष की अपनी संपत्तियों का ब्यौरा नहीं दिया है।

नई दिल्ली। यह भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास में पहली बार हुआ है कि उसने निर्धारित तारीख पर पिछले वर्ष की अपनी संपत्तियों का ब्यौरा नहीं दिया है।

आरबीआइ हर वर्ष जुलाई के पहले पखवाड़े में पिछले वर्ष (जुलाई से जून) का अपनी संपत्तियों का रिपोर्ट जारी करता है लेकिन इस साल नहीं किया है।

ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि केंद्रीय बैंक अभी तक नोटबंदी के बाद वापस आये नोटों की गिनती ही नहीं कर सका है।

आरबीआइ की तरफ से जारी नोटों को उसके दायित्व के तौर पर माना जाता है इसलिए वह सालाना रिपोर्ट जारी नहीं कर सका है। रिपोर्ट जारी कब होगी, यह भी तय नहीं है।

वैसे आरबीआई ने कहा है कि यह रिपोर्ट अगस्त, 2017 में जारी होगी। लेकिन यह तभी संभव होगा जब सिस्टम से वापस आये सभी 500 व 1000 के नोटों की गणना हो जाए।

आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल ने पिछले हफ्ते ही संसदीय समिति को बताया है कि पुराने प्रतिबंधित नोटों की गणना जारी है। इसके लिए बाहर से नए मशीनें भी मंगाई जा रही हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि दो से तीन महीने का समय और लग सकता है।

उन्होंने यह भी बताया था कि लगातार पुराने नोटों की गणना जारी है। बहरहाल, आरबीआइ की तरफ से सालाना रिपोर्ट जारी नहीं होने से कई लोग केंद्रीय बैंक की साख पर एक बड़ा सवाल मान रहे हैं।

सिस्टम में कितने नोट वापस आये हैं, इसका आठ दिसंबर, 2016 तक के आंकड़े ही जारी किये गये हैं।

यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने के बाद हर हफ्ते तक केंद्रीय बैंक की तरफ से वापस आने वाले नोटों की संख्या जारी की गई लेकिन अचानक दिसंबर, 2016 के दूसरे हफ्ते से इसे जारी करना बंद कर दिया गया। बाद में यह बताया गया कि पुराने नोटों को गिनने में वक्त लग रहा है।

हालांकि आरबीआइ के इस तर्क पर विपक्षी पार्टियों समेत कई अर्थविदों ने सवाल उठाये क्योंकि हर केंद्रीय बैंक के पास यह व्यवस्था होती है कि वह वापस आये नोटों की गणना तत्काल करे क्योंकि उसके आधार पर ही नए नोट जारी होते हैं।

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