कैशलेस लेनदेन को प्रोत्साहन को आगे आया मास्टर कार्डUpdated: Mon, 05 Dec 2016 08:57 PM (IST)

कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए कार्ड पेमेंट संचालन करने वाली कंपनियां भी जुट गई हैं।

नई दिल्ली। देश में नकद भुगतान को सीमित करने और कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए कार्ड पेमेंट संचालन करने वाली कंपनियां भी जुट गई हैं। खुदरा विक्रेताओं के बीच कार्ड पेमेंट को लोकप्रिय बनाने के लिए अमेरिकी कंपनी मास्टर कार्ड भी इस अभियान का हिस्सा बनी है। कंपनी खुदरा विक्रेताओं के साथ मिलकर न केवल डेबिट-क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने को प्रोत्साहित करेगी बल्कि उसके फायदे भी बताएगी।

खुदरा विक्रेताओं के बीच कार्ड पेमेंट को स्वीकार्य बनाने के रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन उस पर आने वाली लागत है। हालांकि सरकार ने डेबिट कार्ड से भुगतान पर लगने वाले सभी तरह के ट्रांजैक्शन चार्ज पर छूट देने का एलान किया है। लेकिन क्रेडिट कार्ड पर ये शुल्क अभी भी देय हैं।

मास्टर कार्ड का मानना है कि लंबी अवधि में कार्ड के ट्रांजैक्शन चार्जेज को कम करने के उपाय करने होंगे। मास्टर कार्ड फिलहाल कन्फेडरेशन आफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआइटी) के साथ मिलकर देश में कार्ड संस्कृति को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है।

देश के सभी छोटे-बड़े विक्रेताओं को कार्ड से पेमेंट लेने के फायदे बताए जा रहे हैं। मास्टर कार्ड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी एंड कम्यूनिटी रिलेशन) रविंदर एस. अरोड़ा ने दैनिक जागरण के साथ बातचीत में कहा कि देश में कार्ड पेमेंट लेने की दिक्कत से अधिक टर्मिनल मशीनों की सप्लाई का सवाल बड़ा है। अभी देश में पीओएस मशीनों की संख्या काफी कम है। इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।

सीएआइटी के साथ पिछले दिनों खुदरा विक्रेताओं की एक कार्यशाला को संबोधित करने भारत आए अरोड़ा ने बताया कि कार्ड पेमेंट को बढ़ावा देने से नकदी के प्रबंधन (नकदी रखने और ले जाने) की बैंक पर आने वाली लागत कम हो जाती है। अगर क्रेडिट-डेबिट कार्ड से भुगतान करने की दर में पांच फीसद का इजाफा होता है तो नकदी की लागत पर सरकार को 500 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।

खुदरा विक्रेताओं के साथ चलाये जा रहे कार्यक्रम के बाद अगले तीन महीने में करीब दस लाख टर्मिनल मशीनों की आवश्यकता होगी। अरोड़ा ने कहा कि सरकार को भी लोगों को प्रोत्साहन देने के लिए आगे आना होगा। कार्ड से भुगतान करने पर लोगों को टैक्स छूट का लाभ दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि रियायत पाने के लिए प्रति वर्ष न्यूनतम कार्ड स्वाइप की संख्या तय की जा सकती है। मास्टर कार्ड खुदरा विक्रेताओं के बीच व्याप्त कार्ड पेमेंट में सिक्योरिटी की भ्रांतियों को भी दूर कर रहा है ताकि वे अपने ग्र्राहकों को आगे समझा सकें।

उन्होंने बताया कि कार्ड संचालित करने वाली सभी कंपनियां सुरक्षा के नवीनतम उपाय अपना रही हैं। यही वजह है कि रोजाना करीब 11000 साइबर हमले कार्ड पेमेंट सिस्टम पर होते हैं। लेकिन इनमें से 99 फीसद को बेकार कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मास्टर कार्ड बीते तीन साल में सुरक्षा उपायों पर 7000 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है।

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