एनपीए के खिलाफ बैंकों को मिलेगा अमोघ अस्त्रUpdated: Mon, 01 Aug 2016 11:05 PM (IST)

फंसे कर्जे यानी एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) की समस्या से निजात पाने के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंकों को अमोघ अस्त्र मिलेगा।

नई दिल्ली। फंसे कर्जे यानी एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) की समस्या से निजात पाने के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंकों को अमोघ अस्त्र मिलेगा। यह अस्त्र इन बैंकों को नए कानून के तौर पर मिला है जिसे आज लोकसभा में मंजूरी मिली है। अब इसे राज्यसभा में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

इस कानून का नाम द इंर्फोसमेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एंड रिकवरी ऑफ डेट्स लॉज एंड मिसलेनियस प्रोवीजंस (संशोधन) विधेयक, 2016 है। इस कानून की खासियत यह है कि इसके जरिये एक साथ कर्ज वापसी के चार मौजूदा कानूनों ऋण वसूली प्राधिकरण कानून, सरफेसी कानून, इंडियन स्टांप एक्ट और डिपॉजिटरीज एक्ट में संशोधन हो जाएगा।

कानून को पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कर्ज नहीं लौटाने वाले को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि हम ऐसी व्यवस्था बर्दाश्त नहीं कर सकते है जहां बैंकों से लोग कर्ज लें और उसे वापस नहीं करें। सनद रहे कि सरकारी बैंकों के एनपीए का मुद्दा लगातार काफी गर्म रहा है। उद्योगपति विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर पर बकाये कर्ज की राशि और बाद में उनके देश से बाहर भाग जाने की वजह से इसका राजनीतिकरण भी खूब हुआ।

ताजे आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ सरकारी बैंकों के चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि एनपीए के तौर पर फंसी हुई है। आरबीआइ की रिपोर्ट बताती है कि आठ लाख करोड़ रुपये की रकम आने वाले दिनों में फंस सकती है। इस वजह से ही एक-दो को छोड़कर अधिकांश सरकारी बैंकों को पिछले वित्त वर्र्ष के दौरान काफी घाटा हुआ है। ऐसे में यह कानून सरकारी बैंको को कर्ज वसूलने के लिए ज्यादा अधिकार देगा। कर्ज नहीं लौटाने वाले लोगों या कंपनियों के खिलाफ अब जल्दी और ज्यादा सख्त कदम उठाये जा सकते हैं।

जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाले कंपनियों पर कब्जा करना अब आसान होगा। इन जब्त संपत्तियों को बेचना भी बैंकों के लिए आसान होगा। सनद रहे कि विजय माल्या की परिसंपत्तियों को बेचने में अभी तमाम तरह की अड़चनें आ रही हैं। नए कानून से बैंकों को सबसे बड़ी राहत यह मिलेगी कि अगर किसी व्यक्ति, वर्ग या कंपनी का कर्ज माफ किया जाता है तो उसका प्रावधान केंद्र या राज्य के बजट में करना होगा। जेटली के मुताबिक अगर कर्ज माफ होता है तो उसका प्रावधान कहीं न कहीं करना होगा।

हम ऐसा नहीं कर सकते कि कर्ज लेकर कोई उसे बैंकों को वापस नहीं करे और कर्ज वसूलने की पूरी जिम्मेदारी बैंकों पर डाल दी जाए। कृषि कर्ज को इस नियम से बाहर रखा गया है। साथ शिक्षा कर्ज के बारे में भी जेटली ने कहा कि अगर किसी छात्र को पढ़ाई के बाद भी नौकरी नहीं मिली है तो उस स्थिति में कुछ नरमी के प्रावधान किये गये हैं। लेकिन यहां भी कर्ज की राशि को पूरी तरह से माफ नहीं किया जा सकता।

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