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नोटबंदी के बाद तेज़ी से पनपा डिजिटल पेमेंट का मार्केट, स्‍वाइप मशीनें बढ़ींUpdated: Tue, 11 Apr 2017 05:32 PM (IST)

पिछले साल हुई नोटबंदी के बाद बड़ी संख्‍या में दुकानों पर कार्ड से भुगतान किया जाने लगा। अनेक दुकानों ने कार्ड स्‍वाइप मशीनें रख लीं।

मुंबई। पिछले साल हुई नोटबंदी के बाद बड़ी संख्‍या में दुकानों पर कार्ड से भुगतान किया जाने लगा। अनेक दुकानों ने कार्ड स्‍वाइप मशीनें रख लीं। पीओएस मशीनों की संख्‍या 15 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गई।

स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार अर्थव्‍यवस्‍था में करेंसी नोट की मांग में अभी एक लाख करोड़ तक गिरावट आएगी। नोटबंदी से पहले देश में 15 लाख क्रेडिट कार्ड स्‍वाइप मशीनें थीं।

ये आंकड़ा अक्‍टूबर 2016 तक का है। नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन के अनुसार यह संख्‍या फरवरी में बढ़कर 22 लाख तक पहुंच गई।

इनमें एसबीआई, एक्सिस, एचडीएफसी बैंक, कार्पोरेशन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं। एसबीआई ने सवा लाख मशीनें चार महीने में लगाई हैं। एचडीएफसी और एक्सिस बैंक ने 1 लाख 18 हज़ार मशीनें लगवाई हैं।

कार्पोरेशन बैंक ने 80 हजार 822 और आईसीआईसीआई ने 67 हजार मशीनें लगवाई हैं। एसबीआई के चीफ इकॉनामिस्‍ट सौम्‍य कांति घोष के अनुसार 1 लाख 17 हजार करेाड़ रुपए मूल्‍य के नोटों की छपाई में कमी आई है क्‍योंकि ऑनलाइन भुगतान हो रहा है।

इससे छपाई में आने वाला खर्च पांच सौ से एक हज़ार करोड़ रुपए तक घटा है। आरबीआई ने डिजिटल भुगतान को लेकर आंकड़े भी जारी किए हैं। इसके अनुसार नोटबंदी के बाद से 5 हजार 476 पीओएस मशीनें लगाई गईं!

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