आईटी सेक्टर के 95 फीसद इंजीनियर नौकरी के योग्य नहींUpdated: Thu, 20 Apr 2017 09:12 PM (IST)

आइटी और डाटा साइंस ईकोसिस्टम में भारत के इंजीनियर बुद्धिमत्ता के मामले में पिछड़ते दिख रहे हैं।

नई दिल्ली। आइटी और डाटा साइंस ईकोसिस्टम में भारत के इंजीनियर बुद्धिमत्ता के मामले में पिछड़ते दिख रहे हैं। एक अध्ययन में सामने आया है कि देश के 95 प्रतिशत इंजीनियर सॉफ्टवेयर डवलपमेंट से जुड़ी नौकरियों के लिए काबिल ही नहीं हैं।

रोजगार आकलन से ज़ुड़ी कंपनी एस्पायरिंग माइंड्स के एक अध्ययन में सामने आया कि लगभग 4.77 प्रतिशत उम्मीदवार ही प्रोग्राम के लिए सही लॉजिक लिख पाते हैं जो प्रोग्रामिंग की जॉब के लिए न्यूनतम आवश्यकता है।

आईटी संबंधित कॉलेजों की 500 ब्रांचों के 36,000 से ज्यादा छात्रों ने ऑटोमेटा नाम के टेस्ट में हिस्सा लिया। इनमें से दो-तिहाई छात्र सही-सही कोड भी नहीं डाल सके।

स्टडी में सामने आया कि जहां 60 प्रतिशत उम्मीदवार सही से कोड नहीं डाल पाए। सिर्फ 1.4 प्रतिशत छात्र ही ऐसे निकले जिन्होंने सही कोड डालने में सफलता हासिल की।

एस्पायरिंग माइंड्स के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफीसर व को-फाउंडर वरुण अग्रवाल कहते हैं कि प्रोग्रामिंग स्किल की यह कमी देश के आईटी सिस्टम को खासा प्रभावित कर रही है।

भारत को इसमें और तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। अध्ययन में कहा गया कि प्रोग्रामिंग के विशेषज्ञों की कमी, उम्मीदवारों तक उनका सही ढंग से न पहुंचना रोजगार की खाई पैदा कर रहा है वहीं प्रोग्रामिंग के अच्छे टीचर्स और एक्सपर्ट प्रोग्रामर्स शानदार वेतन पा रहे हैं।

टियर-1 और टियर-3 कॉलेजों के छात्रों में कुशलता के लिहाज से पांच गुना तक का अंतर देखने को मिलता है। 100 टॉप कॉलेज के 69 प्रतिशत छात्र सही कोड डालने में सक्षम हैं, बाकी कॉलेजों के छात्रों का इस मामले में अनुपात महज 31 फीसद था।

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