आसान नहीं होगा पुराने नोट बदलना, आयकर विभाग की रहेगी नजरUpdated: Wed, 09 Nov 2016 08:56 AM (IST)

यह अतना असान भी नहीं होगा क्‍योंकि इस पूरे लेन-देन पर आयकर विभाग की नजर रहेगी।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की घोषणा के बाद 500 और 1000 हजार रुपए के नोट बुधवार से बंद हो चुके हैं हालांकि केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर तक का वक्‍त दिया है जिसमें जनता बैंकों, डाकघरों और को-ऑपरेटिव सोसायटी के माध्‍यम से पुराने नोटों को नए नोटों से बदल सकेंगे। लेकिन यह अतना असान भी नहीं होगा क्‍योंकि इस पूरे लेन-देन पर आयकर विभाग की नजर रहेगी।

दरअसल 500 और एक हजार के नोट बंद करने के साथ ही वित्त मंत्रालय के आयकर विभाग को भी इस कदम से पड़ने वाले असर व माहौल से निबटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

खबरों के अनुसार आने वाले दिनों में देश भर के बैंकों व डाक घरों में बड़ी संख्या में लोगों के आने के आसार हैं। इनमें से कई लोग अपनी 500 व 1000 के नोट को जमा कराने के लिए आएंगे। सरकार का मानना है कि घरों में रखे कालेधन को अब लोग टैक्स अदा कर बैंक खाते में रखने के लिए बाध्य होंगे। इन पर आयकर विभाग को न सिर्फ नजर रखनी है बल्कि आयकर गणना भी करनी है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जो काम स्वैच्छिक आय घोषणा योजना नहीं कर पाई है वह काम सरकार के इस कदम से होगा। यह स्कीम 30 सितंबर को बंद हुई और इसमें 65 हजार करोड़ रुपये की ब्लैक मनी की घोषणा हुई है। लेकिन नई स्कीम के तहत बाजार में जितने भी 500 व 1000 के नोट हैं उन्हें जमा कराना होगा। बाजार में उपलब्ध 500 व 1000 के नोटों की कीमत 14,500 अरब रुपये है।

अगर विश्व बैंक की वर्ष 2010 की रिपोर्ट को ही आधार माना जाए तो 20 फीसद ब्लैक मनी है तो इस हिसाब से 2900 करोड़ रुपये की राशि ब्लैक मनी में हो सकती है। लेकिन यह सिर्फ अनुमान है। कई एजेंसियां यह मानती हैं कि देश की अर्थव्यवस्था का 40 फीसद तक ब्लैक मनी में है। 500 व 1000 रुपये के बड़े नोट रखने वालों के पास इस राशि को बैंकों में जमा कराने के अलावा और कोई चारा नहीं होगा। आय कर विभाग और बैंकों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने के लिए कदम उठा लिया गया है।

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