इनकम टैक्स कानून में बदलाव, अब इतने कैश डिपॉजिट पर भी देना होगा जवाबUpdated: Thu, 24 Nov 2016 10:51 AM (IST)

नोटबंदी के बाद बैंकों और डाकघरों में जमा किए जा रहे कैश पर आयकर विभाग की पैनी नजर है।

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद बैंकों और डाकघरों में जमा किए जा रहे कैश पर आयकर विभाग की पैनी नजर है। अब तक जिस नकदी का कहीं हिसाब-किताब नहीं था, ऐसी राशि को लेकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने कुछ आयकर नियमों में बदलाव किए हैं।

इनकम टैक्स, 1962 के नियम 114ई के तहत अब तक बड़े लेन-देन की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य था। अब इसमेें बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों के तहत, 9 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 के बीच निर्धारित सीमा से ज्यादा कैश खाते में जमा किया गया तो भी जवाब देना पड़ेगा।

आयकर कानून के सेक्शन 285BA के तहत, बैंकों, म्युचुअल फंड्स के साथ ही बॉन्ड जारी करने वाले वित्तीय संस्थानों तथा रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रारों को अपने यहां के खातों में होने वाले बड़े लेन-देन का रिकॉर्ड रखना और आयकर विभाग को उनकी जानकारी देना होती है। इसे AIR यानी एन्युअल इन्फोर्मेशन रिपोर्ट कहा जाता है, जिसे हर साल 31 मई तक जमा किया जाता है।

उदाहरण के लिए, हर बैंक हर साल अपने यहां के खातों में 10 लाख से ज्यादा की राशि जमा होने पर AIR में रिपोर्ट करता है। बहरहाल, नोटबंदी के बाद के हालात को देखते हुए नियम में बदलाव किया गया है। अब आयकर कानून की धारा 114E में यह प्रावधान जोड़ दिया गया है कि 9 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 तक खातों में 2.5 लाख या ज्यादा रुपए जमा करने वालों से भी आय के स्रोत के बारे में पूछा जाएगा। यह नियम 15 नवंबर से लागू हो गया है। बैंक और पोस्ट ऑफिस अपने स्तर पर 31 जनवरी 2017 तक यह रिपोर्ट आयकर विभाग को सौंप देगें, जबकि अमूमन इसकी समयसीमा मई माह होती है।

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